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तिब्बत सीमा तक 25 साल में नहीं बन पाई 85 किमी सड़क
कृष्णा गर्ब्याल /अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 09 Aug 2016 10:14 PM IST
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तिब्बत की मंडी को घोड़ों में सामान ले जाते व्यापारी।
- फोटो : अमर उजाला
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कैलास मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौटने वाले यात्री और भारत-तिब्बत व्यापार में भाग लेने वाले सीमांत के व्यापारी कई बार दोहरा चुके हैं कि चीन ने तिब्बत के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया है। पिछले ढाई दशक में भारतीय सीमा से सटे तिब्बत में विकास की रफ्तार बहुत तेज हुई है।
भारतीय सीमा के पास तक फोरलेन सड़कें बन गई हैं। यह आश्चर्य लोगों को इसलिए होता है क्योंकि, आज भी भारतीय क्षेत्र में तिब्बत के बार्डर लिपुलेख तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। धारचूला से लिपुलेख दर्रे की दूरी 85 किलोमीटर है। इस दूरी में छियालेख से लेकर गर्वाधार तक 28 किलोमीटर के दायरे में सड़क खोदने का काम तक शुरू नहीं हो पाया है। 1991 में जब सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई, तब यह लक्ष्य तय किया गया था कि 2014 तक धारचूला से तिब्बत बार्डर लिपुलेख दर्रे तक गाड़ी पहुंच जाएगी।
बीआरओ ने सड़क के निर्माण का काम अलग-अलग टुकड़ों में किया है। एक तरफ उसने गुंजी से नाभीढांग तक तो सड़क बना दी लेकिन, नाभीढांग से लिपुलेख दर्रे तक सात किलोमीटर के हिस्से में कोई काम नहीं हुआ है। उसी तरह धारचूला से गालागाड़ तक सड़क का निर्माण 1998 में पूरा कर लिया गया था। तब तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री बची सिंह रावत ने सड़क का उद्घाटन करते हुए कहा था कि जल्द ही लिपुलेख दर्रे तक सड़क बन जाएगी, लेकिन उसके बाद काम की गति इतनी धीमी रही कि अब भी एक बड़े हिस्से में सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है।
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तिब्बत सीमा तक इस सड़क का जहां सामरिक नजरिए से महत्व है वहीं इस इलाके में रहने वाली आबादी को सुविधा देने में भी यह सड़क अहम साबित होती। आज भी गुंजी, नाभीढांग, कुटी, रौंगकांग गांवों के लोग निचले इलाकों में आ जाते हैं। छह महीने तक यह गांव आबादी विहीन हो जाते हैं।
यात्रियों को घोड़ों पर करना पड़ता है सफर
भारतीय क्षेत्र में आज भी लोगों को पैदल सफर करना पड़ता है। कैलास मानसरोवर यात्री घोड़ों पर जाते हैं। धारचूला से गुंजी को लिंक करने के लिए अब तक सड़क नहीं बन पाने से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसमें अब कितना समय लगेगा, कहा नहीं जा सकता।
सांसदों ने कहा एक वर्ष में पूरी होगी सड़क
सांसद एवं केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा और नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि लिपुलेख दर्रे तक सड़क अगले साल तक बन जाएगी। बीआरओ को सड़क निर्माण में जो दिक्कत आ रही है, उसे दूर किया जाएगा।
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भारतीय सीमा के पास तक फोरलेन सड़कें बन गई हैं। यह आश्चर्य लोगों को इसलिए होता है क्योंकि, आज भी भारतीय क्षेत्र में तिब्बत के बार्डर लिपुलेख तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। धारचूला से लिपुलेख दर्रे की दूरी 85 किलोमीटर है। इस दूरी में छियालेख से लेकर गर्वाधार तक 28 किलोमीटर के दायरे में सड़क खोदने का काम तक शुरू नहीं हो पाया है। 1991 में जब सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई, तब यह लक्ष्य तय किया गया था कि 2014 तक धारचूला से तिब्बत बार्डर लिपुलेख दर्रे तक गाड़ी पहुंच जाएगी।
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बीआरओ ने सड़क के निर्माण का काम अलग-अलग टुकड़ों में किया है। एक तरफ उसने गुंजी से नाभीढांग तक तो सड़क बना दी लेकिन, नाभीढांग से लिपुलेख दर्रे तक सात किलोमीटर के हिस्से में कोई काम नहीं हुआ है। उसी तरह धारचूला से गालागाड़ तक सड़क का निर्माण 1998 में पूरा कर लिया गया था। तब तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री बची सिंह रावत ने सड़क का उद्घाटन करते हुए कहा था कि जल्द ही लिपुलेख दर्रे तक सड़क बन जाएगी, लेकिन उसके बाद काम की गति इतनी धीमी रही कि अब भी एक बड़े हिस्से में सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है।
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तिब्बत सीमा तक इस सड़क का जहां सामरिक नजरिए से महत्व है वहीं इस इलाके में रहने वाली आबादी को सुविधा देने में भी यह सड़क अहम साबित होती। आज भी गुंजी, नाभीढांग, कुटी, रौंगकांग गांवों के लोग निचले इलाकों में आ जाते हैं। छह महीने तक यह गांव आबादी विहीन हो जाते हैं।
यात्रियों को घोड़ों पर करना पड़ता है सफर
भारतीय क्षेत्र में आज भी लोगों को पैदल सफर करना पड़ता है। कैलास मानसरोवर यात्री घोड़ों पर जाते हैं। धारचूला से गुंजी को लिंक करने के लिए अब तक सड़क नहीं बन पाने से वाहनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसमें अब कितना समय लगेगा, कहा नहीं जा सकता।
सांसदों ने कहा एक वर्ष में पूरी होगी सड़क
सांसद एवं केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा और नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि लिपुलेख दर्रे तक सड़क अगले साल तक बन जाएगी। बीआरओ को सड़क निर्माण में जो दिक्कत आ रही है, उसे दूर किया जाएगा।