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इस बार समय से पहले खिल गया ब्रह्मकमल
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 05 Sep 2016 10:33 PM IST
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इस बार समय से पहले खिल गया ब्रह्मकमल
- फोटो : अमर उजाला
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ग्लोबल वार्मिंग का असर कहें या पिछले साल की कम बर्फबारी इस बार समय से पहले ही हिमालयी क्षेत्र में ब्रह्मकमल खिल गया है। असमय खिलने पर ब्रह्मकमल जल्दी खराब हो जाते हैं। नौ सितंबर को नंदाष्टमी के दिन मां नंदा को ब्रह्मकमल चढ़ाए जाने हैं। अब हिमालय के नजदीक ही ब्रह्मकमल रह गए हैं। ब्रह्मकमल लाने में मां नंदा के भक्तों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
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ब्रह्मकमल समुद्र तल से करीब 4000 मीटर की ऊंचाई में हीरामणि ग्लेशियर के निकट नंदा कुंड क्षेत्र के हीरामणि बुग्याल में खिलता है। अमूमन जुलाई अंत अथवा अगस्त माह में खिलने वाला ब्रह्मकमल इस बार जुलाई की शुरुआत में ही खिल गया। नामिक निवासी शिक्षक भगवान सिंह जेम्याल, बुजुर्ग बहादुर सिंह कन्यारी ने बताया कि चार अगस्त को गांव के लोग हीरामणि बुग्याल गए थे। हर तरफ ब्रह्मकमल खिला था।
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इन लोगों का कहना है कि समय से पहले खिलने से पुष्प खराब हो जाते हैं। पिछले साल काफी कम बर्फबारी हुई थी। कम बर्फबारी हो तो अगले साल ब्रह्मकमल जल्दी खिल जाते हैं। जेम्याल ने बताया कि नामिक, रातिर, केठी, होकरा, सैणराथी, गौला, विर्थी, डोर, गिरगांव, गिनी, सुरिंग आदि गांवों के लोग मां नंदा की पूजा के लिए पुष्प लाते हैं।
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ब्रह्मकमल लाने के लिए गांवों की वर्षवार बारी लगती है। इस बार नामिक, रातिर, केठी, डोर, गिन्नी गांव के लोगों की पुष्प लाने की बारी है। हीरामणि बुग्याल नामिक से 14, विर्थी से 30 किमी दूर है। काफी कठिन रास्ते से होकर वहां तक पहुंचना मुश्किल काम है। कहते हैं इस बार ब्रह्मकमल लाने के लिए हिमालय के नजदीक जाना पड़ेगा। ब्रह्मकमल लाने के लिए लोग गांवों से रवाना हो गए हैं।