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संचार की व्यवस्था ऐसी...देश अपना, नेटवर्क परदेशी, 10,000 से अधिक की आबादी नेपाल का सिम कर रही इस्तेमाल
Thu, 19 Oct 2023 01:44 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
Published by: हीरा मेहरा
Updated Thu, 19 Oct 2023 01:44 PM IST
सार
चंपावत में 70 से अधिक गांव और पिथौरागढ़ की 10,000 से अधिक की आबादी फोन पर बात करने के लिए नेपाल का सिम इस्तेमाल करती है। यह पढ़ने और सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा मगर यह सौ फीसदी सच है।
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fake sim cards
- फोटो : Social Media
विस्तार
धारचूला से दारमा और व्यास घाटियों की ओर अभी संचार सेवाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। पांगला गांव में मोबाइल टावर नहीं लग सका है। यहां की आबादी 2500 है। गांव के लोग शेष दुनिया से संपर्क बनाए रखने के लिए नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं।
धारचूला के व्यास और दारमा घाटियों में अभी संचार सुविधा शुरुआती चरण में है। व्यास घाटी के सात गांवों में वाई फाई सेवा शुरू की है। इसका लाभ गांव के एक सीमित क्षेत्र में ही मिल पाता है। गुंजी से लेकर कालापानी क्षेत्र तक संचार की कोई सुविधा नहीं है। यहां पर जाने वाले पर्यटक या अन्य लोग नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं।
जनपद के जिन क्षेत्रों में संचार सेवा नहीं है वहां पर टावर लगाने के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संचार कंपनियों को जल्द से जल्द टावर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। रीना जोशी, जिलाधिकारी पिथौरागढ़।
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वहीं, चंपावत के नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश, गुमदेश, तल्लपाल, पूर्णागिरि धाम आदि क्षेत्रों के 70 से अधिक गांवों में या तो मोबाइल नेटवर्क नहीं है या सिग्नल कमजोर है। इनमें से कई इलाकों में पड़ोसी देश नेपाल का नेटवर्क काम करता है। नेटवर्क की दिक्कत से इन गांवों में न केवल सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) चलाना मुश्किल हो रहा है, बल्कि बैंकिंग सेवा पाने के लिए भी काफी वक्त बर्बाद होता है।
कई लोग मोबाइल या लैपटॉप को पहाड़ के ऊंचाई वाले या किसी खास स्थान पर भी ले जाते हैं, लेकिन यहां भी सिग्मल मिलेंगे या नहीं यह उनकी किस्मत पर निर्भर है। बीएसएनएल का कहना है कि अब 27 स्थानों पर टावर लगाकर मोबाइल नेटवर्क बेहतर करने का काम चल रहा है।
देश-दुनिया से कनेक्ट रहने के लिए कई लोगों को करना पड़ता है नेपाल के सिम का उपयोग
चंपावत में 70 से अधिक गांव और पिथौरागढ़ की 10,000 से अधिक की आबादी फोन पर बात करने के लिए नेपाल का सिम इस्तेमाल करती है। यह पढ़ने और सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा मगर यह सौ फीसदी सच है। यानी अपने देश में विदेश का नेटवर्क। संचार सुविधा की कमी इन इलाकों में विकास और सुविधाओं पर चोट करने के साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार को भी प्रभावित कर रही है। गुंजी में प्रधानमंत्री के दौरे के समय बीएसएनएल की अस्थायी सेवा शुरू की गई थी। हालांकि कुछ समय पूर्व जियो और एयरटेल की सेवाएं शुरू होने के बाद नेपाल के सिम का प्रयोग कुछ कम हुआ है मगर अधिकतर जगहों पर भारतीय कंपनियों के नेटवर्क नहीं आते हैं।
चंपावत में नो सिग्नल से बढ़ रहा है सिरदर्द
चंपावत जिले में संचार सुविधा को बेहतर करने के लिए नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश जगह काम भी शुरू हो गया है। मार्च 2024 तक सभी टावर लगाए जाने से चंपावत जिले में शत-प्रतिशत संचार सुविधा मिलने लगेगी।-विजय बहादुर, कनिष्ठ दूरसंचार अधिकारी, चंपावत।
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धारचूला के व्यास और दारमा घाटियों में अभी संचार सुविधा शुरुआती चरण में है। व्यास घाटी के सात गांवों में वाई फाई सेवा शुरू की है। इसका लाभ गांव के एक सीमित क्षेत्र में ही मिल पाता है। गुंजी से लेकर कालापानी क्षेत्र तक संचार की कोई सुविधा नहीं है। यहां पर जाने वाले पर्यटक या अन्य लोग नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं।
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जनपद के जिन क्षेत्रों में संचार सेवा नहीं है वहां पर टावर लगाने के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संचार कंपनियों को जल्द से जल्द टावर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। रीना जोशी, जिलाधिकारी पिथौरागढ़।
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वहीं, चंपावत के नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश, गुमदेश, तल्लपाल, पूर्णागिरि धाम आदि क्षेत्रों के 70 से अधिक गांवों में या तो मोबाइल नेटवर्क नहीं है या सिग्नल कमजोर है। इनमें से कई इलाकों में पड़ोसी देश नेपाल का नेटवर्क काम करता है। नेटवर्क की दिक्कत से इन गांवों में न केवल सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) चलाना मुश्किल हो रहा है, बल्कि बैंकिंग सेवा पाने के लिए भी काफी वक्त बर्बाद होता है।
कई लोग मोबाइल या लैपटॉप को पहाड़ के ऊंचाई वाले या किसी खास स्थान पर भी ले जाते हैं, लेकिन यहां भी सिग्मल मिलेंगे या नहीं यह उनकी किस्मत पर निर्भर है। बीएसएनएल का कहना है कि अब 27 स्थानों पर टावर लगाकर मोबाइल नेटवर्क बेहतर करने का काम चल रहा है।
देश-दुनिया से कनेक्ट रहने के लिए कई लोगों को करना पड़ता है नेपाल के सिम का उपयोग
चंपावत में 70 से अधिक गांव और पिथौरागढ़ की 10,000 से अधिक की आबादी फोन पर बात करने के लिए नेपाल का सिम इस्तेमाल करती है। यह पढ़ने और सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा मगर यह सौ फीसदी सच है। यानी अपने देश में विदेश का नेटवर्क। संचार सुविधा की कमी इन इलाकों में विकास और सुविधाओं पर चोट करने के साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार को भी प्रभावित कर रही है। गुंजी में प्रधानमंत्री के दौरे के समय बीएसएनएल की अस्थायी सेवा शुरू की गई थी। हालांकि कुछ समय पूर्व जियो और एयरटेल की सेवाएं शुरू होने के बाद नेपाल के सिम का प्रयोग कुछ कम हुआ है मगर अधिकतर जगहों पर भारतीय कंपनियों के नेटवर्क नहीं आते हैं।
चंपावत में नो सिग्नल से बढ़ रहा है सिरदर्द
चंपावत जिले में संचार सुविधा को बेहतर करने के लिए नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। इनमें से अधिकांश जगह काम भी शुरू हो गया है। मार्च 2024 तक सभी टावर लगाए जाने से चंपावत जिले में शत-प्रतिशत संचार सुविधा मिलने लगेगी।-विजय बहादुर, कनिष्ठ दूरसंचार अधिकारी, चंपावत।