रामगंगा में अस्याली का अस्थायी पुल बहा
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रामगंगा का जलस्तर कम होने के बाद हर साल अक्तूबर में अस्याली के पास बनाया जाने वाला अस्थायी पुल इस बार दो महीने पहले ही पानी की भेंट चढ़ गया है। बुधवार रात ऊपरी रामगंगा घाटी में हुई भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया और रात में किसी समय यह अस्थायी पुल बह गया। बृहस्पतिवार सुबह जब लोग रोज की तरह इस पुल के पास पहुंचे तो वहां पर पुल नहीं था। खोजबीन करने पर पता चला कि पुल का मुख्य लट्ठा करीब 1.5 किमी नीचे नदी के किनारे अटका था। पुल में लगी अन्य सामग्री का कहीं पता नहीं है। अब अस्याली, कलानी, कस्याड़ी, बल्याऊं, सिनतोलिया गांव के लोगों और स्कूली बच्चों को थल आने के लिए आठ किलोमीटर दूर घटीगाड़ झूलापुल तक जाना पड़ रहा है।
अस्याली गांव के लोग बारिश थमने के बाद स्कूली बच्चों, आम लोगों के आवागमन के लिए कई वर्षों से इस अस्थायी पुल का निर्माण करते हैं। इस बार यह पुल आठ अक्तूबर 2016 को तैयार कर लिया गया था। लोगों को मालूम रहता है कि जून में मानसून की बारिश होते ही यह पुल बह जाएगा। पिछले साल 22 जून को पुल बह गया था। इस बार गांववालों के सामने दो महीना पहले ही गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
इस पुल का निर्माण कराने वाले अस्याली गांव के सुरेश रजवार ने बताया कि रामगंगा में बनने वाले इस अस्थायी पुल की लंबाई 80 फुट रहती है। इसे तैयार करने में 15 दिन का समय लगता है। करीब 30 हजार रुपये की राशि लोग आपसी सहयोग से जुटाते हैं। सुरेश रजवार ने कहा कि अब दोबारा इस साल इतनी लागत और श्रम से पुल तैयार कर पाना संभव नहीं है।
स्वीकृति के बाद भी झूलापुल नहीं बना
थल। अस्याली गांव के पास रामगंगा में जिस स्थान पर लोग अस्थायी पुल बनाते हैं, वहां पर झूलापुल की मंजूरी तीन बार हो चुकी है, लेकिन झूलापुल अब तक नहीं बन पाया। जिस स्थान पर अस्थायी पुल बनता है, वहां से थल बाजार की दूरी दो किलोमीटर के करीब होती है। गांव के सुरेश रजवार ने बताया कि झूलापुल बनाने के लिए गांव के लोग 50 साल से मांग कर रहे हैं।
विधायक ने कहा, जल्दी बनेगा झूलापुल
थल। गंगोलीहाट की विधायक मीना गंगोला ने कहा कि अस्याली में स्वीकृत झूलापुल अब तक किन कारणों से नहीं बन पाया, इसकी जानकारी हासिल करेंगे। साथ ही उन्होंने यह वादा किया है कि झूलापुल का निर्माण जल्दी कर लिया जाएगा। यदि कोई अड़चन होगी तो उसे दूर कर लिया जाएगा।
पुल टूटने के मामले की जांच न होने से गुस्सा
पिथौरागढ़। मदनपुर-नैनी मार्ग पर नियोलिया सेरा के पास एक फरवरी को टूटे पुल की अब तक जांच न होने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से कांग्रेस में गुस्सा है। पुल टूटने से सरकारी संपत्ति का नुकसान तो हुआ ही दो लोगों को घटना में जान भी गंवानी पड़ी थी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने कहा कि पुल टूटने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने कमेटी का गठन कर जांच के आदेश दिए थे। इस कमेटी ने अब तक क्या किया यह किसी की जानकारी में नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होना प्रशासन के ढीलेपन को दिखाता है। उन्होंने कहा कि पुल टूटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और उनसे इस नुकसान की भरपाई की जाए। यदि इस मामले की शीघ्र जांच नहीं की गई तो कांग्रेस बड़ा आंदोलन करेगी।