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राज्य सरकार ने कुक्कुट पालन को दिया उद्योग का दर्जा
ब्यूरो/अमर उजाला,पिथौरागढ़
Updated Tue, 09 Feb 2016 10:28 PM IST
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बेरोजगारी से जूझ रहे लोग कुक्कुट (मुर्गी) पालन के माध्यम से अपना जीवन संवार सकते हैं। राज्य सरकार ने कुक्कुट पालन को उद्योग का दर्जा दिया है। पिथौरागढ़ के लिए खास बात यह है कि राज्य सरकार ने कुक्कुट पालन में वित्तीय प्रोत्साहन, अनुदान सहायता के लिए जो वर्गीकरण किया है, उसमें पिथौरागढ़ जिले को ए श्रेणी प्रदान की है। ए श्रेणी में कुक्कुट पालकों को अधिकतम 40 लाख रुपए का अनुदान मिल सकता है। कुक्कुट पालन योजना में क्रायलर प्रजाति की मुर्गी पालन पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार उत्तराखंड में निवेश बढ़ाने, पलायन रोकने, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों की स्थापना करने, रोजगार सृजन, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने, युवाओं के कौशल विकास के लिए उत्तराखंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति 2015 लागू करने का निर्णय लिया है। यह नीति 31 मार्च 2020 तक लागू रहेगी।
जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी बताते हैं कि कुक्कुट पालन में अब क्रायलर प्रजाति के चूजों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। डा. धामी बताते हैं कि राष्ट्रीय कुक्कुट विकास संस्थान चंडीगढ़ ने भारतीय मूल की नस्ल और ब्रायलर के प्रजनन से क्रायलर प्रजाति विकसित की है। क्रायलर चूजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से इनकी मृत्यु दर बहुत कम है। इनके लिए विशेष प्रकार के कुक्कुट आहार की आवश्यकता नहीं पड़ती। अधिक गर्मी और ठंड को सहन करने की क्षमता होती है। क्रायलर मादा सालभर में 180 से 200 अंडे बगैर विशेष आहार के देती हैं। कहा कि एक हजार से एक लाख चूजों का फार्म स्थापित किया जा सकता है। डा. धामी बताते हैं कि जिले के कुक्कुट फार्मर को 40 लाख रुपए तक का अनुदान मिल सकता है। यातायात व्यय, वैट, स्टांप ड्यूटी, बिजली बिलों में छूट का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से उद्योग केंद्र द्वारा संचालित योजना का लाभ उठाने की अपील की है।
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राज्य सरकार उत्तराखंड में निवेश बढ़ाने, पलायन रोकने, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों की स्थापना करने, रोजगार सृजन, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने, युवाओं के कौशल विकास के लिए उत्तराखंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति 2015 लागू करने का निर्णय लिया है। यह नीति 31 मार्च 2020 तक लागू रहेगी।
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जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीएस धामी बताते हैं कि कुक्कुट पालन में अब क्रायलर प्रजाति के चूजों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। डा. धामी बताते हैं कि राष्ट्रीय कुक्कुट विकास संस्थान चंडीगढ़ ने भारतीय मूल की नस्ल और ब्रायलर के प्रजनन से क्रायलर प्रजाति विकसित की है। क्रायलर चूजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से इनकी मृत्यु दर बहुत कम है। इनके लिए विशेष प्रकार के कुक्कुट आहार की आवश्यकता नहीं पड़ती। अधिक गर्मी और ठंड को सहन करने की क्षमता होती है। क्रायलर मादा सालभर में 180 से 200 अंडे बगैर विशेष आहार के देती हैं। कहा कि एक हजार से एक लाख चूजों का फार्म स्थापित किया जा सकता है। डा. धामी बताते हैं कि जिले के कुक्कुट फार्मर को 40 लाख रुपए तक का अनुदान मिल सकता है। यातायात व्यय, वैट, स्टांप ड्यूटी, बिजली बिलों में छूट का प्रावधान है। उन्होंने लोगों से उद्योग केंद्र द्वारा संचालित योजना का लाभ उठाने की अपील की है।
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