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Pithoragarh News: सड़क लंबे समय से बंद, अब पैदल रास्ते पर बना पुल भी बहा
Mon, 28 Jul 2025 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 28 Jul 2025 11:37 PM IST
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बंगपानी तहसील में उफनाए झापुली नाले को जान जोखिम में डालकर पार करते बोना, गोल्फा और तोमिक के ग
बंगापानी (पिथौरागढ़)। बारिश ने तहसील के दूरस्थ गांव बोना, तोमिक और गोल्फा के 500 से अधिक परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन गांवों को जोड़ने वाली मदकोट-बोना सड़क लंबे समय से बंद है। अब इन गांवों को जोड़ने वाले पैदल रास्ते पर झापुली नाले पर बना लकड़ी का पुल भी बह गया है। ग्रामीण और विद्यार्थी गांवों से बाहर निकलने और विद्यालय पहुंचने के लिए उफनाए नाले को जान जोखिम में डालकर पार करने के लिए मजबूर हैं।
बीते रविवार की रात हुई भारी बारिश के बाद झापुली नाला उफान पर आया तो इन गांवों को जोड़ने के लिए बना लकड़ी का पुल बह गया। इन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। 500 से ज्यादा परिवारों की 1500 से अधिक की आबादी घरों में कैद होकर रह गई है। बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए उफनाए नाले को पैदल पार करना मजबूरी बन गया है। इससे दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
क्षेत्र के विद्यार्थी पहले जान जोखिम में डालकर उफनाए नाले को पार कर रहे हैं, इसके बाद सड़क पर गिरे बोल्डरों के बीच आवाजाही कर स्कूल पहुंच रहे हैं। भारी बारिश के बाद पहाड़ी से मलबा गिरा तो झापुली गांव के नजदीक सड़क पर बना कलवर्ट बंद हो गया। कलवर्ट बंद होने से बारिश का पानी और इसके साथ बहकर आया मलबा 10 घरों में घुस गया।
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आपदा के खौफ से प्रभावित परिवार पूरी रात घरों की पहरेदारी करते रहे। सूचना पर सोमवार सुबह राजस्व उपनिरीक्षक डिगर सिंह दानू जेसीबी मशीन लेकर झापुली गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि सड़क पर मलबा और बोल्डर हटाने के लिए बंद कलवर्ट खोलने का काम शुरू कर दिया गया। नाले पर जल्द ही लकड़ी का पुल बनवाया जाएगा। संवाद
झापुली के 10 परिवारों के विस्थापन की मांग
वर्षों से प्रकृति की मार सह रहे झापुली के आपदा प्रभावितों की सुध आज तक नहीं ली गई। यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह दानू ने कहा कि खतरे की जद में यहां के 10 आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन की मांग लंबे समय से की जा रही है। शासन-प्रशासन इसके लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावितों का सुरक्षित स्थान पर विस्थापन नहीं किया गया तो यहां लगातार हो रहा भूस्खलन किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।
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बीते रविवार की रात हुई भारी बारिश के बाद झापुली नाला उफान पर आया तो इन गांवों को जोड़ने के लिए बना लकड़ी का पुल बह गया। इन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। 500 से ज्यादा परिवारों की 1500 से अधिक की आबादी घरों में कैद होकर रह गई है। बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए उफनाए नाले को पैदल पार करना मजबूरी बन गया है। इससे दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
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क्षेत्र के विद्यार्थी पहले जान जोखिम में डालकर उफनाए नाले को पार कर रहे हैं, इसके बाद सड़क पर गिरे बोल्डरों के बीच आवाजाही कर स्कूल पहुंच रहे हैं। भारी बारिश के बाद पहाड़ी से मलबा गिरा तो झापुली गांव के नजदीक सड़क पर बना कलवर्ट बंद हो गया। कलवर्ट बंद होने से बारिश का पानी और इसके साथ बहकर आया मलबा 10 घरों में घुस गया।
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आपदा के खौफ से प्रभावित परिवार पूरी रात घरों की पहरेदारी करते रहे। सूचना पर सोमवार सुबह राजस्व उपनिरीक्षक डिगर सिंह दानू जेसीबी मशीन लेकर झापुली गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि सड़क पर मलबा और बोल्डर हटाने के लिए बंद कलवर्ट खोलने का काम शुरू कर दिया गया। नाले पर जल्द ही लकड़ी का पुल बनवाया जाएगा। संवाद
झापुली के 10 परिवारों के विस्थापन की मांग
वर्षों से प्रकृति की मार सह रहे झापुली के आपदा प्रभावितों की सुध आज तक नहीं ली गई। यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह दानू ने कहा कि खतरे की जद में यहां के 10 आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन की मांग लंबे समय से की जा रही है। शासन-प्रशासन इसके लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावितों का सुरक्षित स्थान पर विस्थापन नहीं किया गया तो यहां लगातार हो रहा भूस्खलन किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।