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पंचेश्वर बांध को लेकर सीमांत वासी आशंका में

Wed, 15 Mar 2017 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट Updated Wed, 15 Mar 2017 10:35 PM IST
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The possibility of a marginal resident pancheshwar dam
इसी स्थान पर प्रस्तावित है पंचेश्वर बांध - फोटो : अमर उजाला

महाकाली के किनारे सटे झूलाघाट के लोग पंचेश्वर बांध को लेकर आशंका में तो हैं, लेकिन उनको अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि यह बांध परियोजना वास्तव में बनेगी या नहीं। बांध के डूब क्षेत्र में झूलाघाट भी शामिल है। 12 फरवरी 1996 को इस बांध परियोजना का प्रस्ताव नए सिरे से तैयार हुआ था। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और उनकी नेपाल यात्रा के बाद बांध परियोजना के निर्माण की सुगबुगाहट ज्यादा तेज हुई। 12 फरवरी 2017 को जब प्रधानमंत्री ने पिथौरागढ़ में चुनाव सभा की थी, तब भी उन्होंने पंचेश्वर बांध परियोजना का जिक्र किया था।

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कुल 6480 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखने वाली इस परियोजना पर 35 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। 315 मीटर ऊंचाई वाले इस बांध के डूब क्षेत्र में 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आएगा। झूलाघाट भी उनमें शामिल है। झूलाघाट के लोगों का कहना है कि बांध परियोजना को लेकर हल्ला 60 वर्षों से हो रहा है, लेकिन अब तक यह मूर्त रूप में सामने नहीं आया है। झूलाघाट में लोगों में आशंका होने के बावजूद वह तत्काल किसी प्रकार की विरोध की तैयारी में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब परियोजना निर्माण के समय विस्थापन की नौबत आएगी तो उस समय जैसी स्थितियां बनेंगी उसी के अनुसार काम किया जाएगा। लोग तो यही कहते हैं कि सरकार को बांध की ऊंचाई कम करनी चाहिए, ताकि उसका डूब क्षेत्र कम से कम हो। 
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बांध बनने पर विरोध होगा
स्थानीय निवासी युवा डब्बू गड़कोटी का कहना है कि बांध बनने पर यदि विस्थापन की नौबत आएगी तो विरोध किया जाएगा। वह कहते हैं कि इतना बड़ा बांध बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यहां के लोग विस्थापन के बाद कहां जाएंगे। उनकी रोजी-रोटी का क्या होगा, सरकार को पहले यह तय करना चाहिए। 
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बांध की ऊंचाई को कम किया जाए
युवा विप्लव भट्ट का कहना है कि बांध की ऊंचाई 100 मीटर से ज्यादा न रखी जाए। ऐसा करने से डूब क्षेत्र सीमित हो जाएगा और लोगों की आशंकाएं भी समाप्त हो जाएंगी। वह कहते हैं कि जब सरकार ने इरादा कर ही लिया है तो लोगों के भविष्य को लेकर भी नीति तय करनी चाहिए। तभी सीमांत के लोगों का भय समाप्त होगा। 

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