तब पार्टी प्रचार के लिए एक जीप और 20 हजार रुपए देती थी
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में 1967 से लगातार तीन बार डीडीहाट से विधायक चुने गए 84 वर्षीय गोपाल दत्त ओझा का कहना है कि तब पार्टी चुनाव प्रचार के लिए एक जीप और 20 हजार रुपए तक देती थी। प्रत्याशी का अपना करीब 20 हजार रुपए और खर्च होता था। 1967 में उन्होंने डीडीहाट सीट से जनसंघ के दावेदार जगत सिंह चौहान को हराया। वह कहते हैं कि उस समय पहाड़ों पर सड़कें नहीं थी। प्रत्याशी को एक दिन में 20 किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ता था। कांग्रेस के इस बुजुर्ग नेता ने बताया कि पार्टी छह महीने पहले ही प्रत्याशी को बता देती थी कि अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार करो।
ओझा बताते हैं कि पहाड़ पर तब पलायन का ऐसा संकट नहीं था। सभी गांव आबादी से भरे होते थे। बंदरों या अन्य जंगली जानवरों का आतंक नहीं था। लोगों की मुख्य जरूरत सड़क और बिजली थी। सिर्फ कस्बों को छोड़कर अन्य जगह बिजली नहीं थी। चुनाव में मुख्य मुद्दे स्कूल, सड़क और बिजली ही थी। 1969 में ओझा ने फिर डीडीहाट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। तब उन्होंने जनसंघ के दावेदार गोविंद सिंह पांगती को हराया। 1974 में तीसरी बार जब वह चुनाव मैदान में उतरे, तब भी उनके खिलाफ गोविंद सिंह पांगती ही चुनाव लड़ रहे थे। ओझा बताते हैं कि 1974 के चुनाव तक खर्च की सीमा थोड़ा बढ़ गई थी। तब पार्टी 60 हजार रुपए देती थी और खर्चा करीब एक लाख रुपए तक आने लगा।
वह बताते हैं कि विधायक चुने जाने के बाद उनको 1967 में सिर्फ 450 रुपए वेतन मिलता था। 1969 में यह राशि 750 रुपए और 1974 में 1250 रुपए हो गई। वह कहते हैं कि उस समय फारेस्ट एक्ट की जटिलताएं नहीं थी। इसी कारण अपने कार्यकाल में ओगला से भागीचौरा, सातशिलिंग से थल, पलेटा से मड़मानले वाली सड़क मंजूर करा दी। बेड़ीनाग का डिग्री कॉलेज भी उसी दौर में बना। पिथौरागढ़ जिले में तब डीडीहाट और पिथौरागढ़ दो ही विधानसभा सीट थी। पिथौरागढ़ सीट में चंपावत जिला भी शामिल था। तब और आज के चुनाव के बारे में वह कहते हैं कि अब दावेदारों के पास साधन ज्यादा हैं, लेकिन लोगों से संपर्क कम होते जा रहे हैं, जो दावेदार जनता की आवाज को सही ढंग से उठाएगा उसे चुनाव में जीत जरूर मिल जाएगी। वह कहते हैं कि तब कांग्रेस का जबर्दस्त बोलबाला था। कई पार्टियां नहीं होती थी।