{"_id":"69b053fcb77cb518e40831e1","slug":"the-pain-of-pabhya-water-every-three-kilometers-education-13-kilometers-away-pithoragarh-news-c-8-hld1045-732446-2026-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: पभ्या की पीड़ा... तीन किमी पर पानी, 13 किमी दूर पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: पभ्या की पीड़ा... तीन किमी पर पानी, 13 किमी दूर पढ़ाई
Tue, 10 Mar 2026 10:55 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 10 Mar 2026 10:55 PM IST
विज्ञापन
-पलायन से खाली हो रहा गणाई गंगोली का पभ्या गांव। संवाद
गणाई गंगोली। सुदूर पर्वतीय अंचल में बसे पभ्या गांव की कहानी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझते ग्रामीण जीवन का जीता-जागता सबूत है। पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतें पूरी न होने से गांव से पलायन लगातार बढ़ रहा है। 100 परिवारों के वाले इस गांव में अब सिर्फ 38 परिवार रह गए हैं।
गांव में वर्षों से ग्रामीणों के लिए पेयजल की समस्या बनी हुई है। हर घर नल से जल पहुंचाने के कागजी दावों के बीच यहां लोगों को पीने के पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। वर्ष 1988 में करीब 25 किमी दूर से बनाई गई पेयजल योजना अब जर्जर हो चुकी है। पाइपलाइन के बार-बार खराब होने से जलापूर्ति आए दिन ठप हो जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को तीन किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोत से पानी ढोकर लाना पड़ता है। इस कठिनाई से तंग आकर कई परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात यह हैं कि कई घरों में अब ताले लटक गए हैं और कई मकान धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
गांव तक सड़क न पहुंचने से समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार मरीजों को डोली के सहारे लंबी दूरी तय कर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों ने भी लोगों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया है। संवाद
विज्ञापन
पलायन से स्कूलों पर लग गए ताले पभ्या गांव में पलायन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। छात्रसंख्या लगातार घटने के कारण दो साल पहले खोले गए प्राथमिक विद्यालय पर ताले लग गए हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। गांव में बचे निर्धन परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई बड़ी चुनौती बन गई है। उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए 13 किमी दूर गणाई गंगोली में किराये का कमरा लेकर रहना पड़ रहा है।
बोले ग्रामीण
गांव तक सड़क नहीं है। पीने के लिए पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पलायन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हमारा गांव खाली हो रहा है और रिवर्स पलायन करने के लिए सुविधाएं नहीं हैं। - गोविंद सिंह डोबाल, प्रधान, पभ्या
-- -- -- -- -- -
यदि हमारे गांव तक सड़क पहुंचती तो ग्रामीण पलायन नहीं करते। अब गांव खाली हो गया है। खेत बंजर हो गए हैं। पलायन रोकने के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। - संजय सिंह डोबाल, पभ्या
-- -- -- -- -- -- -- --
गांव तक सड़क न होने से बीमारों और गर्भवतियों की जान बचाना भी मुश्किल होता है। इस दिक्कत से जूझते लोग गांव छोड़ते जा रहे हैं। गांव में बचे लोग भी पलायन करने का मन बना रहे हैं। - कुंदन डोबाल, पभ्या
-- -- -- -- -- --
सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधा हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत है। सिस्टम हमें ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सका। दुश्वारियां झेलने के बजाय ग्रामीणों ने पलायन करना उचित समझा। यह सिस्टम की अनदेखी का ही नतीजा है। - दीपू डोबाल, पभ्या
कोट
पभ्या गांव तक सड़क पहुंचाना मेरी प्राथमिकता है। सड़क स्वीकृत भी हो चुकी है और सर्वे भी कर लिया गया है। - फकीर राम टम्टा, विधायक, गंगोलीहाट
-- -- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
गांव में वर्षों से ग्रामीणों के लिए पेयजल की समस्या बनी हुई है। हर घर नल से जल पहुंचाने के कागजी दावों के बीच यहां लोगों को पीने के पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। वर्ष 1988 में करीब 25 किमी दूर से बनाई गई पेयजल योजना अब जर्जर हो चुकी है। पाइपलाइन के बार-बार खराब होने से जलापूर्ति आए दिन ठप हो जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को तीन किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोत से पानी ढोकर लाना पड़ता है। इस कठिनाई से तंग आकर कई परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। हालात यह हैं कि कई घरों में अब ताले लटक गए हैं और कई मकान धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
विज्ञापन
गांव तक सड़क न पहुंचने से समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार मरीजों को डोली के सहारे लंबी दूरी तय कर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों ने भी लोगों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया है। संवाद
विज्ञापन
पलायन से स्कूलों पर लग गए ताले पभ्या गांव में पलायन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। छात्रसंख्या लगातार घटने के कारण दो साल पहले खोले गए प्राथमिक विद्यालय पर ताले लग गए हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। गांव में बचे निर्धन परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई बड़ी चुनौती बन गई है। उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए 13 किमी दूर गणाई गंगोली में किराये का कमरा लेकर रहना पड़ रहा है।
बोले ग्रामीण
गांव तक सड़क नहीं है। पीने के लिए पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने पलायन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हमारा गांव खाली हो रहा है और रिवर्स पलायन करने के लिए सुविधाएं नहीं हैं। - गोविंद सिंह डोबाल, प्रधान, पभ्या
यदि हमारे गांव तक सड़क पहुंचती तो ग्रामीण पलायन नहीं करते। अब गांव खाली हो गया है। खेत बंजर हो गए हैं। पलायन रोकने के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। - संजय सिंह डोबाल, पभ्या
गांव तक सड़क न होने से बीमारों और गर्भवतियों की जान बचाना भी मुश्किल होता है। इस दिक्कत से जूझते लोग गांव छोड़ते जा रहे हैं। गांव में बचे लोग भी पलायन करने का मन बना रहे हैं। - कुंदन डोबाल, पभ्या
सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधा हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत है। सिस्टम हमें ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सका। दुश्वारियां झेलने के बजाय ग्रामीणों ने पलायन करना उचित समझा। यह सिस्टम की अनदेखी का ही नतीजा है। - दीपू डोबाल, पभ्या
कोट
पभ्या गांव तक सड़क पहुंचाना मेरी प्राथमिकता है। सड़क स्वीकृत भी हो चुकी है और सर्वे भी कर लिया गया है। - फकीर राम टम्टा, विधायक, गंगोलीहाट