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Pithoragarh News: बीमारी दिल की हो या दिमाग की, यहां नहीं मिलता इलाज
Sat, 17 Oct 2026 12:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:06 AM IST
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चंपावत। सीमांत चंपावत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलती एक और बड़ी समस्या सामने आई है। जिला अस्पताल सहित लोहाघाट और टनकपुर के उपजिला अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) और मनोरोग विशेषज्ञ का एक भी पद सृजित या तैनात न होने से दिल और दिमाग के मरीजों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में इन गंभीर बीमारियों के इलाज की कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को मजबूरी में बरेली, हल्द्वानी या दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
वर्ष 1997 में जिला बनने और 2012 से संचालित जिला अस्पताल में रोजाना लोहाघाट, बाराकोट, पाटी, मंच समेत दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 500 मरीज उपचार के लिए आते हैं। यहां हड्डी, नेत्र, बाल और स्त्री रोग विशेषज्ञ की सेवाएं तो मिल जाती हैं लेकिन हृदय रोगियों को मजबूरन सामान्य फिजीशियन से ही काम चलाना पड़ता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक आने पर मरीज को तुरंत विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है। चंपावत से 200 किलोमीटर दूर हल्द्वानी या 400 किलोमीटर दूर बरेली पहुंचने में एंबुलेंस को छह से सात घंटे का लंबा समय लग जाता है। अत्यधिक दूरी और समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जिले के अस्पतालों में जल्द हृदय रोग और मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती की पुरजोर मांग की है।
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स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। जिले में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। एनएचएम के तहत जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए विभागीय पत्राचार किया गया है। -डॉ. देवेश चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंपावत
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वर्ष 1997 में जिला बनने और 2012 से संचालित जिला अस्पताल में रोजाना लोहाघाट, बाराकोट, पाटी, मंच समेत दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 500 मरीज उपचार के लिए आते हैं। यहां हड्डी, नेत्र, बाल और स्त्री रोग विशेषज्ञ की सेवाएं तो मिल जाती हैं लेकिन हृदय रोगियों को मजबूरन सामान्य फिजीशियन से ही काम चलाना पड़ता है।
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चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक आने पर मरीज को तुरंत विशेषज्ञ उपचार की जरूरत होती है। चंपावत से 200 किलोमीटर दूर हल्द्वानी या 400 किलोमीटर दूर बरेली पहुंचने में एंबुलेंस को छह से सात घंटे का लंबा समय लग जाता है। अत्यधिक दूरी और समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जिले के अस्पतालों में जल्द हृदय रोग और मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती की पुरजोर मांग की है।
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स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है। जिले में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। एनएचएम के तहत जिला अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए विभागीय पत्राचार किया गया है। -डॉ. देवेश चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंपावत