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इस बार बढ़ाए छह जेसीबी और पोकलैंड
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 24 Jun 2016 10:47 PM IST
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मानसून सीजन के लिए तैयार जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले साल लोक निर्माण विभाग, सीमा सड़क संगठन, पीएमजीएसवाई, एडीबी के पास कुल 56 जेसीबी, पोकलैंड और डोजर मशीनें थी, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़ाकर 62 हो गई है। जो जेसीबी खराब हालत में हैं उनकी मरम्मत का काम चल रहा है। प्रशासन ने मानसून सीजन में सड़कों पर यातायात बनाए रखने को प्रमुख एजेंडे में शामिल किया है। यह बात अलग है कि पिछले दिनों पिथौरागढ़-तवाघाट हाइवे को खेलने में ही बीआरओ को 12 से 20 घंटे तक लग गए।
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प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सबसे संवेदनशील सड़कों पर कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग को रखा है। यह सड़क अल्मोड़ा से आगे सेराघाट से गणाई, राईआगर, बेड़ीनाग, थल, डीडीहाट, ओगला, अस्कोट, जौलजीबी, धारचूला, तवाघाट, नारायणआश्रम तक सबसे ज्यादा संवेदनशील है। अस्कोट के आगे पिनौड़ागाड़ में तो इस बार यह सड़क दो बार बंद हो चुकी है। थल से बेड़ीनाग के बीच हजेती बैंड के पास सड़क अक्सर बंद हो जाती है। अस्कोट और जौलजीबी के बीच भी कई खतरनाक स्पॉट हैं। धारचूला से तवाघाट के बीच भी कई स्थानों पर मलबा आने का खतरा रहता है।
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तवाघाट से नारायणआश्रम के बीच छिरकिला और खेत में कब सड़क धंस जाए, कहा नहीं जा सकता। आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी विभागों में उपलब्ध मशीनों का रिकार्ड तैयार किया है। इस समय उपलब्ध 62 मशीनों को कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग के अलावा सातशिलिंग-थल, थल-मुनस्यारी, मुनस्यारी-मदकोट सड़क पर तैनात किया जाएगा। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा का कहना है कि सड़कों को खोलने के लिए पूरे संसाधन उपलब्ध हैं, यदि सड़कों को बड़ा डैमेज नहीं हुआ तो किसी भी सड़क में ज्यादा समय तक यातायात बंद नहीं रहेगा।
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लाइफलाइन की हालत ठीक नहीं
जिले को मैदान से जोड़ने वाली दो प्रमुख सड़कें हैं। एक सड़क चंपावत होते हुए टनकपुर तक जाती है। यह सड़क एनएच के अधीन है। दूसरी सड़क अल्मोड़ा होते हुए हल्द्वानी तक जाती है। इस सड़क की देखरेख लोनिवि करती है। दोनों सड़कों पर घाट, ध्याड़ी, पनार में मलबा गिरने का खतरा बना रहता है, यदि यह सड़कें बंद हुई तो जिले के लिए राशन, सब्जी, अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई ठप हो जाती है।
बार-बार हो रही तैयारी की समीक्षा
जिलाधिकारी एचसी सेमवाल सड़कों की स्थिति और तैयारी की बार-बार समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग से कहा है कि सड़कों की रोज की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाए और इसकी एक प्रति कुमाऊं आयुक्त को भी भेजी जाए। आपदा प्रबंधन विभाग रोज का फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार करता है। एक जून से रोज रिपोर्ट तैयार करने का काम चल रहा है।