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Pithoragarh News: मुनस्यारी-मिलम सड़क बनने से फिर आबाद होंगे सीमांत के वीरान गांव

Sat, 25 Oct 2025 11:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 25 Oct 2025 11:04 PM IST
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The construction of the Munsiyari-Milam road will repopulate the deserted border villages.
भारत-चीन सीमा पर स्थित सीमांत मिलम गांव। संवाद
मुनस्यारी(पिथौरागढ़)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मुनस्यारी-मिलम के बीच सड़क बनने से पलायन से खाली हो चुके सीमांत गांवों के फिर से आबाद होने की उम्मीद जगी है। सड़क मुनस्यारी से मिलम तक बन गई है। वर्ष 2008 से इसका निर्माण चल रहा था, जो अब पूरा हुआ है। अभी इस सड़क पर आधिकारिक रूप से यातायात सुचारु नहीं किया गया है। विधिवत आवाजाही शुरू होने पर सीमांत के पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
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वाइब्रेंट विलेज के तहत प्रथम चरण में भारत-चीन सीमा पर मल्ला जोहार के 13 में से सात गांव मिलम, बुर्फू, बिल्जू, पांछू, टोला, रिलकोट, मरतोली सामुदायिक सुविधाओं और ढांचागत विकास के लिए चयनित किए गए हैं। इन क्षेत्रों को मुनस्यारी से जोड़ने की कवायद लंबे समय से चल रही थी। मुनस्यारी से सीमांत मिलम तक 65 किमी लंबे मोटर मार्ग का काम पूरा हो गया है। संवाद
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903 आवासों को मंजूरी से भी बढ़ेगी आबादी
सीमांत में जरूरतमंदों को सरकार की ओर से आवास दिए जा रहे हैं। प्रथम चरण में मल्ला जोहार के 903 लोगों ने पीएम आवास योजना के लिए आवेदन किया था। इसकी स्वीकृति मिल चुकी है। ग्राम विकास अधिकारी बिजेंद्र महर ने बताया कि दूसरे चरण में 253 आवेदन प्रतीक्षारत हैं। सरकार का मानना है कि आवास निर्माण और सामुदायिक सुविधाओं के विकास से भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित गांव फिर से आबाद हो सकते हैं।
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गतिविधियां बढ़ने से होगा रिवर्स पलायन

मिलम मोटर मार्ग निर्माण के बाद सीमांत के गांवों में होम स्टे, पर्वतारोहण, ट्रैकिंग आदि पर्यटन व साहसिक गतिविधियां बढ़ेंगी। अधिक रोजगार सृजित होंगे। इससे स्थानीय लोगों की आय भी बढ़ेगी। सीमांत से पलायन की गति धीमी होगी। रिवर्स पलायन की उम्मीद भी है।

भारत-तिब्बत व्यापार भी बढ़ेगा

वर्ष 1965 से पहले भारत का चीन व तिब्बत से व्यापार सीमांत के गांवों से संचालित होता था। ज्ञानिमा मंडी से व्यापार का आदान-प्रदान होता था। मिलम व्यापार का एक बड़ा केंद्र था लेकिन समय के साथ हालात बदले तो व्यापार भी मंदा होता चला गया। कभी आबाद रहने वाला मिलम साल दर साल वीरान घरों के साथ खंडहर गांव में तब्दील हो गया। तिब्बत व्यापार करने वाले बुजुर्ग कालू राम को एक बार फिर इस क्षेत्र से व्यापार शुरूहोने की उम्मीद जगी है।


कोट

मुनस्यारी-मिलम सड़क बनने से मल्ला जोहार के लोग रिवर्स पलायन का मन बना रहे हैं। कई लोगों ने आवास के लिए आवेदन किया है। ऐसा होना सुखद है। - विजेंद्र महर, ग्राम विकास अधिकारी, मुनस्यारी
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