अप्रत्याशित हार से कांग्रेस सकते में
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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ऐसी हार की उम्मीद नहीं थी। सभी बड़े नेता सकते में हैं। पिथौरागढ़ सीट पर कांग्रेस के मयूख महर सशक्त उम्मीदवारों में से एक थे। उन्होंने यहां पर विकास के कई काम किए और 12 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने जवाब में यहां पर बड़ी रैली की। रैली में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए, लेकिन इस रैली का भी मतदाताओं पर कोई असर नहीं पड़ा। कांग्रेस के दफ्तर में शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। आखिरी चरण की गिनती के बाद कांग्रेस के नेता घरों को चले गए और अधिकांश ने फोन बंद कर दिए। इस कारण हार के बारे में किसी की भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
गंगोलीहाट से कांग्रेस के नारायण राम आर्य मैदान में थे। उनके खिलाफ भाजपा का नया चेहरा मैदान में उतरने से यह आकलन किया जा रहा था कि आर्य के लिए यह सीट आसान हो जाएगी, लेकिन आर्य भी इस चुनाव में हार गए। आर्य से भी बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। डीडीहाट में कांग्रेस ने एकदम नया चेहरा प्रदीप पाल के रूप में मैदान में उतारा था। प्रदीप पाल को टिकट मिलते ही कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष भी हुआ। कई पुराने नेता जो टिकट पाने की कोशिश में थे, उनको इस फैसले से भारी निराशा हुई। टिकट मिलने के बाद असंतोष भी उभरा था। सिर्फ धारचूला सीट से कांग्रेस की लाज बची है।