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मुनस्यारी में दुर्लभ पक्षियों का खूबसूरत संसार
दिनेश अवस्थी/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Tue, 13 Nov 2018 10:50 PM IST
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सत्यर ट्रेगोपॉन
- फोटो : अमर उजाला
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हिमनगरी मुनस्यारी में पक्षियों का खूबसूरत संसार है। क्षेत्र में पक्षियों की करीब 340 प्रजातियां चिन्हित हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां ऐसी हैं, जो बेहद दुर्लभ हैं। शिकारियों की नजरों से इन्हें बचाना बेहद जरूरी हो गया है। अलबत्ता कुछ युवा वर्तमान में गाइड का काम कर बर्ड वाचिंग करा रहे हैं। साथ ही स्कूलों में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
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मॉस ऑफ नेचर एंड एडवेंचर लवर्स (मोनाल) संस्था साहसिक खेलों के साथ ही बर्ड वाचिंग का कार्य कर रही है। संस्था ने क्षेत्र में पक्षियों की करीब 340 प्रजातियां चिन्हित की हैं। इनमें से राज्य पक्षी मोनाल, कलिजफिजेंट, कोकलास फिजेंट, चीर फिजेंड, स्नो काक, स्नो पार्टरिज, रेड हेडेड वुलफिंच का शिकार काफी संख्या में होता है। इन दिनों उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात के चलते करीब 3700 मीटर तक की ऊंचाई पर रहने वाले यह पक्षी 2600 मीटर नीचे तक आ जाते हैं। अभी जो पक्षी बेहद आकर्षित कर रहा है वह है सत्यर ट्रेगोपान।
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मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि यह पक्षी बेहद कम दिखाई देता है। सुबह धूप निकलने और शाम को सूरज अस्त होते समय यह अपने मादा साथी को आवाज देता है। नर लाल और भूरे रंग का, जबकि मादा भूरे रंग की होती है, उसके शरीर पर काले धब्बे होते हैं। इसकी आवाज बिल्ली के रोने जैसी होती है। इसके चलते लोग इसकी आवाज से ही डर जाते हैं। बकौल सुरेंद्र, उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला चीर फिजेंड बेहद दुर्लभ श्रेणी में है। मुनस्यारी क्षेत्र में इसके अब तक तीन जोड़े ही देखे गए हैं। इसका वजन तीन किलो तक होता है।
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यलो थ्रोटेड मार्टिन है पक्षियों का दुश्मन
मुनस्यारी क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों का दुश्मन शिकारियों के साथ ही यलो थ्रोटेड मार्टिन भी है। इसे पक्षियों के प्रजनन का इंतजार रहता है। सत्यर ट्रेगोपॉन के अंडे इसे बेहद पसंद हैं। यह घनी झाड़ियों में घुसकर पक्षियों के अंडे खा जाता है।
इन स्थानों से होती है बर्ड वाचिंग
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के बेटुलीधार, बलाती फार्म, पातलथौड़, खलियाटॉप, दरकोट, नंदा देवी मंदिर से खूबसूरत और रंगबिरंगे पक्षियों के संसार को देखा जा सकता है। पुणे, कोलकाता, दिल्ली, राजस्थान से बर्ड वाचरों की टीम इन्हें देखने आती है। नवंबर से अप्रैल तक इन पक्षियों को देखने का उपयुक्त समय है।