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तो अब होगा हरड़िया का स्थायी समाधान
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
Updated Wed, 07 Sep 2016 10:27 PM IST
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हरड़िया नाले में बोरिंग करा रही लोनिवि
- फोटो : अमर उजाला
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कई वर्षों से यातायात के लिए आफत बने हरड़िया और नई बस्ती के डेंजर जोन का समाधान निकालने की कोशिशों में सरकार जुट गई है। हरड़िया और नई बस्ती में बोरिंग कराकर ट्रीटमेंट का प्लान तैयार किया जा रहा है।
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हरड़िया और नई बस्ती भूस्खलन के कारण हर बरसात में तीन महीने थल-मुनस्यारी सड़क से कट जाती है। हर साल इस पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन लाभ कुछ नहीं मिलता। लोनिवि हर साल सड़क के दोनों ओर वायरक्रेट की दीवार लगाता है, जो बगैर टूटे पूरी रामगंगा में समा जाती है। इस बार सरकार ने विशेषज्ञों से जांच कराई। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया कि 30 से 45 मीटर नीचे रॉक बेस से निर्माण करने से समस्या का समाधान होगा।
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लोनिवि टिहरी हाइड्रोपावर डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) के बोरिंग सिस्टम से तल की ठोस जांच करा रहा है। टीएचडीसी से आए उत्तम सिंह चौहान ने बताया कि 200 मीटर क्षेत्र में तीन या चार स्थानों पर बोर टेस्ट किया जा रहा है। 30 से 45 मीटर नीचे हार्डरॉक मिलने की संभावना है। एक महीने के भीतर जांच का काम पूरा हो जाएगा। लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी ने बताया कि हार्डरॉक मिलने पर आरसीसी से सुरक्षा दीवार का निर्माण होगा। हरड़िया में लगे वैलीब्रिज को और उठाया जाएगा।
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