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पिथौरागढ़: हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए दारमा घाटी में होंगे कार्य
Sat, 18 Feb 2023 10:49 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 18 Feb 2023 10:49 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत तहसील धारचूला की दारमा घाटी में हाल ही में पहली बार हिम तेंदुआ दिखाई देने के बाद स्टेट बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की टीम भी सक्रिय हो गई है। टीम के सदस्य बिशन सिंह बोनाल ने घाटी के चल गांव तक का भ्रमण कर ग्रामीणों से हिम तेंदुए के साथ ही जीवों के संरक्षण के बारे में बातचीत की। ग्रामीणों के साथ साझा हुए अनुभवों को अब बोनाल सरकार के साथ साझा करेंगे। जल्द ही हिम तेंदुए के सरंक्षण के लिए दारमा घाटी में कार्य किए जाएंगे।
पर्यावरण, वन्य जीवों के सरंक्षण के लिए वर्ष 2018 में चार पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल, सिक्किम और उत्तराखंड में सिक्योर हिमालय चलाया गया। बोनाल ने बताया कि हिम तेंदुआ चार हजार से 15 हजार फिट की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसके संरक्षण के लिए गंगोत्र और नंदा देवी घाटियों में कार्य पहले से ही चल रहा था। बाद में धारचूला की दारमा घाटी में भी हिम तेंदुए की मौजूदगी का पता करने के लिए अध्ययन किया गया।
ग्रामीण पूर्व से ही कहते थे कि क्षेत्र में हिम तेंदुए हैं। सर्दियों में घाटी में माइग्रेशन के बाद हिम तेंदुए भोजन की तलाश में नीचे आते हैं। पहली बार कैमरे में हिम तेंदुआ कैद होने के बाद राजकीय वन्य प्राणी बोर्ड भी इस मामले में संजीदा हो गया है। बोनाल कहते हैं कि हिम तेंदुए को बचाने के लिए इसका शिकार रोकना होगा।
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बगैर ग्रामीणों और शिकारियों को जागरूक किए यह संभव नहीं है। इसके साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमालयन थार, भरल, घुरड़, ब्लू शिप के शिकार को पूरी तरह रोकना होगा। नर्सरी बनाकर वनीकरण करना होगा। इसके लिए स्टाफ के लोगों की तैनाती के साथ ही स्थानीय जनता का भी सहयोग लेना होगा।
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पर्यावरण, वन्य जीवों के सरंक्षण के लिए वर्ष 2018 में चार पहाड़ी राज्यों जम्मू कश्मीर, हिमाचल, सिक्किम और उत्तराखंड में सिक्योर हिमालय चलाया गया। बोनाल ने बताया कि हिम तेंदुआ चार हजार से 15 हजार फिट की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसके संरक्षण के लिए गंगोत्र और नंदा देवी घाटियों में कार्य पहले से ही चल रहा था। बाद में धारचूला की दारमा घाटी में भी हिम तेंदुए की मौजूदगी का पता करने के लिए अध्ययन किया गया।
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ग्रामीण पूर्व से ही कहते थे कि क्षेत्र में हिम तेंदुए हैं। सर्दियों में घाटी में माइग्रेशन के बाद हिम तेंदुए भोजन की तलाश में नीचे आते हैं। पहली बार कैमरे में हिम तेंदुआ कैद होने के बाद राजकीय वन्य प्राणी बोर्ड भी इस मामले में संजीदा हो गया है। बोनाल कहते हैं कि हिम तेंदुए को बचाने के लिए इसका शिकार रोकना होगा।
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बगैर ग्रामीणों और शिकारियों को जागरूक किए यह संभव नहीं है। इसके साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमालयन थार, भरल, घुरड़, ब्लू शिप के शिकार को पूरी तरह रोकना होगा। नर्सरी बनाकर वनीकरण करना होगा। इसके लिए स्टाफ के लोगों की तैनाती के साथ ही स्थानीय जनता का भी सहयोग लेना होगा।