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सांप, बिच्छू ने काटा तो नहीं मिलेगा इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
Updated Sat, 18 Feb 2017 10:38 PM IST
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झूलाघाट का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
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भारत-नेपाल सीमा पर स्थित झूलाघाट के एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सांप और बिच्छू के काटने पर इलाज की कोई सुविधा नहीं है। यदि किसी को सांप या बिच्छू काट ले तो उसे 36 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। अप्रैल से इस घाटी वाले इलाके में सांप, बिच्छू एवं अन्य जहरीले कीटों का खतरा बढ़ जाता है।
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झूलाघाट अस्पताल में भारतीय क्षेत्र के गांवों के साथ-साथ नेपाल के बैतड़ी और दार्चुला जिले से भी मरीज आते हैं, लेकिन अस्पताल में हमेशा दवाओं का अभाव बना रहता है। जीवनरक्षक दवाओं की कभी पूरी व्यवस्था नहीं की जाती। इस कारण लोगों को अस्पताल होते हुए भी जिला मुख्यालय दौड़ना पड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ता डा. कोमलानंद जोशी ने कहा कि पहले क्षेत्र के लोगों ने डॉक्टर की तैनाती की मांग को लेकर आंदोलन किया था।
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अब जीवनरक्षक दवाओं की व्यवस्था के लिए आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीमांत के इस अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल को सिर्फ रेफर सेंटर बना रखा है। किसी ने भी अब तक अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की पहल नहीं की।
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पीएचसी में इस तरह की दवा रखने की व्यवस्था नहीं
सीएमओ डा. यूएस अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में सांप के काटने पर इलाज की सुविधा संभव नहीं हो पाती। यदि किसी के साथ घटना हो जाए तो उसे जिला अस्पताल ही लाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जहर मिटाने वाली दवा रखने के लिए अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था की जरूरत होती है।