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Pithoragarh News: सामान्य प्रसव कराकर बचाई जच्चा-बच्चा की जान
Fri, 19 Jun 2026 10:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:59 PM IST
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मुनस्यारी(पिथौरागढ़)। समकोट निवासी ममता देवी (26) का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सामान्य प्रसव कराया गया। 43 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था के बावजूद जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
ममता की संभावित प्रसव तिथि 28 मई थी। तिथि बीतने पर उन्हें जिला महिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। उन्होंने मना कर दिया और घर लौट गईं। बीते बृहस्पतिवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें सीएचसी लाए। जांच में पता चला कि शिशु गर्भ में शौच कर चुका था। बच्चेदानी का मुंह भी खुल गया था। प्रभारी चिकित्साधिकारी ले. कर्नल अजय कुमार और नलिनी पांगती की टीम ने सीएचसी में प्रसव कराने का निर्णय लिया। ममता ने तीन किलोग्राम के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
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प्रसव कराने में लगे दो घंटे
डॉ. नलिनी ने बताया कि ममता ने प्रसव के लिए महिला अस्पताल न जाकर अपने साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की जान भी आफत में डाल दी। गर्भावस्था के 10 महीने से अधिक का समय होने के बाद भी न तो वह महिला अस्पताल गई और न परिजन उसे वहां ले गए। उन्होंने बताया कि यदि उसे इस हालत में रेफर किया जाता तो वह समय रहते महिला अस्पताल नहीं पहुंच सकती थी। ऐसे में सीएचसी में ही प्रसव कराया गया इसमें दो घंटे से अधिक का समय लगा। संवाद
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ममता की संभावित प्रसव तिथि 28 मई थी। तिथि बीतने पर उन्हें जिला महिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। उन्होंने मना कर दिया और घर लौट गईं। बीते बृहस्पतिवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें सीएचसी लाए। जांच में पता चला कि शिशु गर्भ में शौच कर चुका था। बच्चेदानी का मुंह भी खुल गया था। प्रभारी चिकित्साधिकारी ले. कर्नल अजय कुमार और नलिनी पांगती की टीम ने सीएचसी में प्रसव कराने का निर्णय लिया। ममता ने तीन किलोग्राम के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
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प्रसव कराने में लगे दो घंटे
डॉ. नलिनी ने बताया कि ममता ने प्रसव के लिए महिला अस्पताल न जाकर अपने साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु की जान भी आफत में डाल दी। गर्भावस्था के 10 महीने से अधिक का समय होने के बाद भी न तो वह महिला अस्पताल गई और न परिजन उसे वहां ले गए। उन्होंने बताया कि यदि उसे इस हालत में रेफर किया जाता तो वह समय रहते महिला अस्पताल नहीं पहुंच सकती थी। ऐसे में सीएचसी में ही प्रसव कराया गया इसमें दो घंटे से अधिक का समय लगा। संवाद
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