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नौले-धारे बचाओ, जीवन बचाओ अभियान चलाएंगे डा.अवस्थी
अमर उजाला ब्यूराे पिथौरागढ़।
Updated Mon, 25 Jun 2018 11:07 PM IST
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नौले की सफाई करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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नशामुक्ति, चेलिन बचा-चेलिन पढ़ा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रहे डॉ.पीतांबर अवस्थी अब नौले-धारे बचाओ, जीवन बचाओ अभियान चलाएंगे। इस अभियान की शुुरुआत उन्होंने नगर के सेरा गांव में परंपरागत जल स्रोत की सफाई कर की।
डॉ.अवस्थी ने कहा कि हजारों की आबादी की प्यास बुझाने वाले नौले-धारे शहरीकरण से बर्बाद हो रहे हैं। अधिकांश नौलों में सीवर की गंदगी घुसने से इनका पानी जहरीला हो चुका है। लगातार बढ़ रही आबादी के कारण एक ओर पानी का संकट बढ़ रहा है जबकि प्राकृतिक नौले धारे या तो सूख रहे हैं या फिर उनका पानी पीने के योग्य नहीं है। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ शहर में कई धारों का अस्तित्व अतिक्रमण के कारण समाप्त हो गया है।
चिमस्यानौला, पांडेगांव का नौला, कोत का नौला, खड़कोट नौला सहित कई पुराने नौलों का अस्तित्व खतरे में है। इन प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण को लेकर आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। यदि इसी तरह से नौले-धारों की उपेक्षा की गई तो भविष्य में लोगों को गंभीर जल संकट झेलना पड़ सकता है। सेरा में नौले के सफाई के अवसर पर डा.आनंदी जोशी, राम सिंह, विक्रम सिंह, हर्षिता, दीपा, साक्षी आदि शामिल थे।
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सौंदर्यीकरण के नाम पर कंक्रीट डालना गलत
पिथौरागढ़। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे डॉ.अवस्थी का कहना है कि वर्तमान में सौंदर्यीकरण के नाम पर नौले-धारों में आरसीसी का उपयोग किया जा रहा है। इससे नौलों के आसपास बरसाती पानी भूमि के अंदर नहीं जा पाता है। इससे धीरे-धीरे जल स्रोत के पानी में कमी आने लगती है।
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डॉ.अवस्थी ने कहा कि हजारों की आबादी की प्यास बुझाने वाले नौले-धारे शहरीकरण से बर्बाद हो रहे हैं। अधिकांश नौलों में सीवर की गंदगी घुसने से इनका पानी जहरीला हो चुका है। लगातार बढ़ रही आबादी के कारण एक ओर पानी का संकट बढ़ रहा है जबकि प्राकृतिक नौले धारे या तो सूख रहे हैं या फिर उनका पानी पीने के योग्य नहीं है। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ शहर में कई धारों का अस्तित्व अतिक्रमण के कारण समाप्त हो गया है।
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चिमस्यानौला, पांडेगांव का नौला, कोत का नौला, खड़कोट नौला सहित कई पुराने नौलों का अस्तित्व खतरे में है। इन प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण को लेकर आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। यदि इसी तरह से नौले-धारों की उपेक्षा की गई तो भविष्य में लोगों को गंभीर जल संकट झेलना पड़ सकता है। सेरा में नौले के सफाई के अवसर पर डा.आनंदी जोशी, राम सिंह, विक्रम सिंह, हर्षिता, दीपा, साक्षी आदि शामिल थे।
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सौंदर्यीकरण के नाम पर कंक्रीट डालना गलत
पिथौरागढ़। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे डॉ.अवस्थी का कहना है कि वर्तमान में सौंदर्यीकरण के नाम पर नौले-धारों में आरसीसी का उपयोग किया जा रहा है। इससे नौलों के आसपास बरसाती पानी भूमि के अंदर नहीं जा पाता है। इससे धीरे-धीरे जल स्रोत के पानी में कमी आने लगती है।