उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार की ओर से दो दिनी संस्कृत छात्र प्रतियोगिता शुरू हो गई है। केएनयू राइंका में प्रतियोगिता का शुभारंभ जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत सबसे प्राचीन और सभी भाषाओं की जननी है। उन्होंने नित्य बोलचाल की भाषा में संस्कृत को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रतियोगिता के जिला संयोजक डॉ. कैलाश चंद्र जोशी ने कहा कि संस्कृत के शब्द भंडार की संख्या संसार की अन्य भाषाओं की तुलना में कई गुना अधिक है।
मुख्य शिक्षाधिकारी अशोक कुमार जुकरिया ने कहा कि संस्कृत सबसे सरल, सरस भाषा है। उत्तराखंड सरकार ने भी हिन्दी के बाद संस्कृत को द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता दी है। प्रतियोगिता में शामिल छात्र-छात्राओं ने नृत्य, समूहगान, नाटक पेशकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दो दिनी प्रतियोगिता में कनिष्ठ और वरिष्ठ वर्गों में छह प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता का समापन मंगलवार को होगा। इस मौके पर भाष्कर कर्नाटक, गीता जोशी, डॉ. गीता पंत, दीपा जोशी, दीपा कोठारी, गोविंद शर्मा, जानकी जोशी, पुष्पा मेहता, अनुश्री कसन्याल, सुनीता सिंह, रेवती मेहता, हेमा पांडेय, सुमिता सिंह, संतोष साह, राम दत्त जोशी, आरपी जोशी, सुरेश कर्नाटक, संजय पांडेय, डॉ. पीतांबर अवस्थी, रमेश जोशी, विनोद जोशी, मोहन जोशी, डिगर देव, संजय गुप्ता आदि रहे।