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रामगंगा घाटी में होने लगी है रुद्राक्ष की पैदावार
अमर उजाला ब्यूूूूराे पिथौरागढ़।
Updated Fri, 02 Feb 2018 10:22 PM IST
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नाचनी के आमधार में रुद्राक्ष के फलों से लदा पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
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भारत के पूर्वोत्तर राज्यों आसाम, अरुणाचल के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में भगवान शिव के प्रिय रुद्राक्ष की काफी पैदावार होती है। 800 से 1400 मीटर की ऊंचाई में पैदा होने वाले रुद्राक्ष के पेड़ जिले की रामगंगा घाटी में फलफूल रहे हैं। रामगंगा घाटी में सफलता पूर्वक रुद्राक्ष की पैदावार हो रही है। यह किसी सरकार अथवा संबंधित महकमे की मेहरबानी नहीं बल्कि स्थानीय लोगों के स्वयं के प्रयासों से संभव हुआ है। नाचनी के आमधार में रुद्राक्ष के दो पेड़ पिछले सात साल से फल दे रहे हैं।
वर्ष 2007 में आमधार निवासी आईटीबीपी के रिटायर्ड डीआईजी मंगल सिंह दानू अरुणांचल से रुद्राक्ष के दो पौधे लेकर आए। उनके छोटे भाई जेएस दानू और भाई की पत्नी चंद्रकला दानू ने दोनों पेड़ों की देखरेख की। तीन साल बाद ही वर्ष 2010 में दोनों पेड़ फल देने लगे। रामगंगा घाटी के ही थल में भी एक व्यक्ति का रुद्राक्ष का पेड़ फल देने लगा है। रुद्राक्ष को भगवान शंकर का स्वरूप माना जाता है। हिंदु समाज में रुद्राक्ष को पूजा जाता है। रुद्राक्ष की माला से भगवान का जप किया जाता है। रुद्राक्ष की देशभर में भारी मांग रहती है। आमधार में पैदा हो रहा रुद्राक्ष प्रमाण है कि घाटी वाले इलाकों में रुद्राक्ष लोगों के लिए रोजगार के द्वार खोल सकता है।
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जेएस दानू बताते हैं कि रुद्राक्ष एक से चौदह मुखी तक होते हैं। बताते हैं कि अब तक विभिन्न मुखी रुद्राक्ष मिल गए हैं। यहां पांच मुखी रुद्राक्ष अधिक होता है। बताते हैं। एक मुखी रुद्राक्ष के अभी तक दीदार नहीं हुए हैं। बताते हैं रुद्राक्ष में नवंबर, दिसंबर में फूल आते हैं, अप्रैल में फल पुष्ट होता है। उनके पास दो प्रकार के पेड़ हैं। एक में छोटा, एक में बड़ा दाना आता है। बताते हैं कि हरिद्वार, देहरादून, गढ़वाल में भी रुद्राक्ष पैदा किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में रुद्राक्ष बेल्ट विकसित करने के लिए ठोस योजना बननी चाहिए। रुद्राक्ष लोगों की आजीविका में सुधार ला सकता है।
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कैलाश यात्रा मार्ग में लगाए हैं रुद्राक्ष के पेड़
पिथौरागढ़। प्रगतिशील काश्तकारों में शुमार जेएस दानू रुद्राक्ष की पूजा करने के इच्छुक लोगों को निशुल्क रुद्राक्ष देते हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने जौलजीबी, जीआईसी परिसर, कालिका, धारचूला में रुद्राक्ष के पौधे रोपे थे। वह कई गांवों के लोगों को निशुल्क रुद्राक्ष के पौधे दे चुके हैं। बताते हैं कि तेजम में रुद्राक्ष फल देने लगा है। कई स्थानों में देखरेख के अभाव में पौधे सूख गए। बताते हैं कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वन सेल में रुद्राक्ष के पौधे उपलब्ध हैं। लोग वहां से पौधे ला सकते हैं।
आजीविका से जोड़ा जाएगा रुद्राक्ष: वित्त मंत्री
प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत कहते हैं कि रामगंगा घाटी में कुछ लोग रुद्राक्ष का उत्पादन कर रहे हैं, यह अच्छी बात है। इनके काम को आगे बढ़ाया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि रुद्राक्ष सजावटी वृक्ष की श्रेणी में है और वन विभाग के अ
धीन है। रामगंगा घाटी में रुद्राक्ष को आजीविका से जोड़ा जाएगा। च्यूरा के साथ ही रुद्राक्ष रामगंगा घाटी के लोगों की आमदनी बढ़ाने में मददगार होगा, इसके लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।