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40 साल से अधूरा है चरमाघाटी के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली सड़क का काम
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पिथौरागढ़। 40 सालों से चरमाघाटी के मलान, मितड़ा पुरमड़ा, खुचेटा, आणागांव, पातलीगांव, ख्वांकोट क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कार्य अधर में लटका है। आज भी इन गांवों में आपात की स्थिति में डोली ही लोगों का सहारा बनती है।
80 के दशक में पिथौरागढ़-धारचूला राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे बंदरलीमा, आणागांव ख्वांकोट सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया। चार किमी सड़क कटने के बाद यह सड़क वन अधिनियम में फंस गई। वर्ष 2005 में सड़क का काम आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ काम करने के बाद इसका निर्माण कार्य फिर अधूरे में छोड़ दिया गया। सड़क के अभाव में यहां के लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुसीबत के समय में लोग डोली के सहारे गांव के बीमार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को सड़क तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं।
वाहन सुविधा के लिए खचेटा और मितड़ा के ग्रामीणों को चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर गुड़ौली जाना पड़ता है। लोग सुविधाओं के अभाव में यहां से पलायन कर रहे हैं। जिस कारण कृषि योग्यभूमि लगातार बंजर होती जा रही है। यहां के छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए मीलों पैदल जाना पड़ता है। पूर्व प्रधान दिलराम का कहना कि वर्षों से क्षेत्र की अनदेखी के कारण लोग परेशान हैं। इस संबंध में लोनिवि अस्कोट के ईई आशुतोष कुमार का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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80 के दशक में पिथौरागढ़-धारचूला राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे बंदरलीमा, आणागांव ख्वांकोट सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया। चार किमी सड़क कटने के बाद यह सड़क वन अधिनियम में फंस गई। वर्ष 2005 में सड़क का काम आगे बढ़ाया गया, लेकिन कुछ काम करने के बाद इसका निर्माण कार्य फिर अधूरे में छोड़ दिया गया। सड़क के अभाव में यहां के लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुसीबत के समय में लोग डोली के सहारे गांव के बीमार बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को सड़क तक पहुंचाने के लिए मजबूर हैं।
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वाहन सुविधा के लिए खचेटा और मितड़ा के ग्रामीणों को चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर गुड़ौली जाना पड़ता है। लोग सुविधाओं के अभाव में यहां से पलायन कर रहे हैं। जिस कारण कृषि योग्यभूमि लगातार बंजर होती जा रही है। यहां के छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए मीलों पैदल जाना पड़ता है। पूर्व प्रधान दिलराम का कहना कि वर्षों से क्षेत्र की अनदेखी के कारण लोग परेशान हैं। इस संबंध में लोनिवि अस्कोट के ईई आशुतोष कुमार का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन भूमि की सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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