खलियाटॉप में दिखा रेड फाक्स और घुरड़
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मोनाल संस्था की टीम इन दिनों 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलियाटॉप एवं उसके आसपास के इलाकों में जैव विविधता का अध्ययन कर रही है। वहां विभिन्न प्रकार की पक्षियों, फूलों के साथ-साथ टीम के सदस्यों को हिमालयन रेड फाक्स और घुरड़ भी दिखा है। रेड फाक्स अक्सर 3500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर रहता है, लेकिन यदि सर्दियों में ज्यादा हिमपात हो गया तो यह 3000 मीटर से नीचे नहीं उतरता। मांसाहारी यह वन्यजीव कुनबा बनाकर रहता है। इसके कुनबे में सात से आठ तक की संख्या रहती है। चट्टानों में बनी खोहों में यह अपना आवास बनाता है।
मोनाल के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि पहली बार नजदीक से रेड फाक्स देखने का सौभाग्य मिला। रेड फाक्स बेहद चतुर होता है। सियारों और लोमड़ी की तरह इसमें तेज गति से भागने की क्षमता होती है। हिमालयी बुग्यालों में शिकार के लिए यह काफी दूर तक दौड़ लगा देता है। यदि कहीं पर शिकार मिल गया तो सारा कुनबा एक साथ हमला करता है। उन्होंने बताया कि हिमालयन रेड फाक्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
सुरेंद्र पंवार के साथ चंद्रमोहन पांडे, दीपक पंवार, बृजेश धर्मशक्तू, पुष्कर आर्या, दीपक कोटाल को खलियाटॉप में ही घुरड़ भी दिखाई दिया। यह मृग की तरह होता है और कठिन चट्टानों पर चढ़ जाता है। टीम के सदस्यों ने बताया कि इस समय खलियाटॉप एवं उसके आसपास के इलाकों में कई वन्यजीव नजर आने लगे हैं। टीम के सदस्य पिछले तीन दिनों से खलियाटॉप में जैवविविधता का अध्ययन कर रहे हैं। बाद में वह रिपोर्ट शासन को देंगे।
फाक्स और घुरड़ को शिकारियों का खतरा
मोनाल संस्था के सदस्यों का कहना है कि रेड फाक्स और घुरड़ को शिकारियों से गंभीर खतरा है। कई बार तो फाक्स को शिकारी खोह में आग लगाकर मार देते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीव तस्कर काफी सक्रिय हैं और वह जंगलों में आग लगाकर शिकार करते रहते हैं। अब तक वन विभाग किसी भी शिकारी को नहीं पकड़ पाया है। आने वाले समय में यदि इन शिकारियों पर रोक नहीं लगी तो कई दुर्लभ जीव समाप्त हो जाएंगे।