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रेडीमेड कपड़ा व्यापारी की हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
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पिथौरागढ़। ढाई दशक पूर्व थल में दिल्ली के व्यापारी की हत्या के मामले में पिथौरागढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषी नौकर को आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
दिल्ली निवासी प्रकाश लाल ग्रोवर की बागेश्वर और बेड़ीनाग में रेडीमेड कपड़ों की दुकान और थल में कपड़ों का गोदाम था। चार नवंबर 1996 को प्रकाश लाल ने परिजनों को फोन पर दिवाली में घर नहीं आने और जौलजीबी मेले में जाने की बात कही थी। फिर व्यापारी का परिजनों के साथ कोई संपर्क नहीं हो सका। उसके बाद जब दिल्ली से व्यापारी के परिजन यहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि प्रकाश लाल दो माह से जौलजीबी नहीं आए हैं। 22 फरवरी 1997 को बेड़ीनाग थाने पहुंचे परिजनों को पुलिस ने थल में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना दी। शव की पहचान व्यापारी प्रकाश लाल के रूप में की गई। इस मामले में व्यापारी के पुत्र की ओर से नौकर छोटे लाल पर हत्या का शक जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने छोटे लाल को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी छोटेलाल न्यायिक बंदीगृह डीडीहाट से 27 नवंबर 1998 को भाग गया था। गैर जमानती वारंट जारी होने पर पुलिस ने 19 जून 2021 को आरोपी को गिरफ्तार किया था। यह मामला जिला सत्र न्यायालय में चला।
आरोपी छोटे लाल ने बताया कि व्यापारी प्रकाश लाल उस पर अप्राकृतिक रूप से शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता था। इससे परेशान होकर उसने तवे से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दोषी छोटे लाल पुत्र सुंदर लाल निवासी किटिया निजाबन बरेली को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा जबकि धारा 201 में पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रेम सिंह भंडारी ने पैरवी की।
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दिल्ली निवासी प्रकाश लाल ग्रोवर की बागेश्वर और बेड़ीनाग में रेडीमेड कपड़ों की दुकान और थल में कपड़ों का गोदाम था। चार नवंबर 1996 को प्रकाश लाल ने परिजनों को फोन पर दिवाली में घर नहीं आने और जौलजीबी मेले में जाने की बात कही थी। फिर व्यापारी का परिजनों के साथ कोई संपर्क नहीं हो सका। उसके बाद जब दिल्ली से व्यापारी के परिजन यहां पहुंचे तो उन्हें पता चला कि प्रकाश लाल दो माह से जौलजीबी नहीं आए हैं। 22 फरवरी 1997 को बेड़ीनाग थाने पहुंचे परिजनों को पुलिस ने थल में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना दी। शव की पहचान व्यापारी प्रकाश लाल के रूप में की गई। इस मामले में व्यापारी के पुत्र की ओर से नौकर छोटे लाल पर हत्या का शक जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने छोटे लाल को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी छोटेलाल न्यायिक बंदीगृह डीडीहाट से 27 नवंबर 1998 को भाग गया था। गैर जमानती वारंट जारी होने पर पुलिस ने 19 जून 2021 को आरोपी को गिरफ्तार किया था। यह मामला जिला सत्र न्यायालय में चला।
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आरोपी छोटे लाल ने बताया कि व्यापारी प्रकाश लाल उस पर अप्राकृतिक रूप से शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता था। इससे परेशान होकर उसने तवे से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दोषी छोटे लाल पुत्र सुंदर लाल निवासी किटिया निजाबन बरेली को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा जबकि धारा 201 में पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रेम सिंह भंडारी ने पैरवी की।
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