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Pithoragarh News: देवभूमि के रंग में रंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा के आठवें दल के यात्री

Sat, 01 Aug 2026 10:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sat, 01 Aug 2026 10:56 PM IST
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Passengers of the eighth batch of Kailash Mansarovar Yatra painted in the colors of Devbhoomi
01tnp03pटनकपुर के टीआरसी में सनातन रंग में रगे वि​भिन्न प्रदेशों के सबसे बुजुर्ग कैलाश मानसरो
टनकपुर(चंपावत)। कैलाश मानसरोवर यात्रा के आठवें दल के 15 राज्यों के 49 शिवभक्तों के टनकपुर स्थित टीआरसी पहुंचते ही तिलक और फूलमाला से स्वागत किया गया। इससे अभिभूत शिव भक्त कुमाऊंनी गीतों पर झूम उठे और देवभूमि के रंग में रंग गए। अधिकांश यात्री पहली बार शिवधाम जाने को लेकर उत्साहित दिखे। इनमें अधिकांश देवभूमि के चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका देवभूमि से लगाव है। अलग-अलग बोली भाषा होने के बावजूद सभी एक भाव सनातन में डूबे नजर आए।
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शनिवार को आठवें दल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान टीआरसी हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान रहा। दल के एलओ उमा माहेश्वर राव ने बताया कि दल में 15 राज्यों के 49 यात्री शामिल हैं। इनमें 38 पुरुष और 11 महिला यात्री हैं। अधिकांश पहली बार यात्रा कर रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद की दो सगी बहनें कलाकार हेटल पटेल और शिक्षिका श्रद्धा पटेल ने बताया कि उनके पिता जयंती भाई पटले ने वर्ष 1989 में कैलाश मानसरोवर यात्रा की थी। उनकी भी इच्छा थी कि वह भी शिव धाम जाएं और आज महादेव ने बुला लिया। उन्होंने बताया कि वह आदि कैलाश, केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं।
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गुजरात के भावनगर निवासी जितेंद्र ने बताया कि वह अपनी पत्नी नीलाबेन के साथ यात्रा पर आए हैं। वह बोले इस यात्रा में पहली बार जा रहे हैं। सनातनी हैं तो सनातन की पावन यात्रा से बड़ा और क्या होगा। हर यात्री के अलग-अलग पृष्ठभूमि है लेकिन उनका भाव सनातन से शिव की भक्ति में रमे रहे। टीआरसी मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि रविवार सुबह हरी झंडी दिखाकर दल को आगे रवाना किया जाएगा।
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बुजुर्ग सनातनी बोले-भक्ति को समर्पित है गृहस्थ जीवन का आखिरी पड़ाव
टनकपुर(चंपावत)। कैलाश मानसरोवर यात्रा में शारीरिक रूप से फिटनेस सही होने पर 70 वर्ष तक यात्रा में बुजुर्ग शामिल होते हैं, हर दल में 69 वर्ष तक के बुजुर्ग शिवभक्त शामिल रहे, लेकिन आठवें दल में 60 से 69 वर्ष के 16 यात्री पूरे जोश के साथ शामिल नजर आए। इनमें यूपी के बैशाली के ओएनजीसी से सेवानिवृत्त अनिल कुमार सचान बोले- उनकी आयु 69 वर्ष से अधिक है।

बस कुछ माह ही 70 वर्ष होने में बचे हैं और उनको शिव ने बुला ही लिया। उनका तो देवभूमि से लगाव है और पंतनगर कृषि विवि से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की थी, देवभूमि की संस्कृति में पूरे रंगे हैं। केरल के 60 वर्षीय शाहजी बोले-चार धाम के दर्शन कर चुके हैं और उनकी तो दिन चर्या में सनातन की पद्धति में शुरू होता है। शिव का आदेश आ गया तो जाना ही पड़ा। कर्नाटक के 64 वर्षीय अशोक हेरूर वेंकटेश, 68 वर्षीय चरन कुमार, 69 वर्षीय हरियाणा के राजेश कुमार, 65 वर्षीय राजस्थान के भवानी शंकर आदि भी खासे उत्साहित रहे। अनेक बुजुर्ग बोले- वानप्रस्थ में तो भगवान के दर्शन के लिए देवभूमि हिमालय में भगवान के दर्शन के लिए सनातन में पुरखे आते ही थी। अभी वह गृहस्थ जीवन में हैं, लेकिन अब धार्मिक अधिक हैं।
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