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कनालीछीना में बीएडीपी मद से खरीदी गई आधुनिक एंबुलेंस गैरेज में फांक रही है धूल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Feb 2022 12:36 AM IST
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Old Vehicles of Health Department
पिथौरागढ़ में खड़ा सचल चिकित्सा वाहन खड़े-खड़े सड़ गया है। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कनालीछीना में पिछले दो सालों से आधुनिक एंबुलेंस वाहन धूल फांक रहा है। आलम ये है कि एंबुलेंस वाहन खड़े-खड़े खराब होने की कगार पर पहुंच चुका है। इसके बाद भी वाहन के संचालन के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। संचालन के अभाव में एक अत्याधुनिक वाहन कलक्ट्रेट के पास सड़क किनारे कबाड़ में तब्दील हो रहा है।
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बीएडीपी योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक एंबुलेंस वाहन खरीदा था। आधुनिक एंबुलेंस खरीदने का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्र में रह रहे लोगों के घर-घर जाकर उन्हें उपचार दिलाना था। पिछले दो सालों से अस्पताल में ड्राइवर के न होने के कारण आधुनिक एंबुलेंस वाहन धूल फांक रहा है। कुछ समय पूर्व तक कनालीछीना अस्पताल प्रबंधन ने वाहन को अस्पताल परिसर के बाहर खड़ा किया था। ये वाहन बारिश, धूप में खड़ा-खड़ा खराब हो रहा था।
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स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने वाहन को चलाने की मांग तो स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस को गैराज में खड़ा दिया। इस एंबुलेंस वाहन में पैथोलॉजी लैब सहित छोटे अस्पतालों में अनुपलब्ध व्यवस्थाओं की सुविधा है लेकिन वाहन चालक के अभाव में एंबुलेंस खड़ी-खड़ी खराब हो रही है। इनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. रविशंकर श्रीवास्तव का कहना है कि दो साल से ड्राइवर न होने के कारण एंबुलेंस खड़ी है। इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है।
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कोरोना काल में भी नहीं हुआ एंबुलेंस का संचालन
पिथौरागढ़। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कनालीछीना में खड़ी आधुनिक एंबुलेंस वाहन का संचालन कोरोना काल में भी नहीं हो पाया है। कई मरीजों ने एंबुलेंस के अभाव में दम तोड़ दिया। इसके बाद भी जनता के प्रयोग के लिए आधुनिक एंबुलेंस वाहन को नहीं चलाया गया। इधर कलक्ट्रेट में पिछले कई सालों से खड़ी एंबुलेंस जंग खा रही है।
इसमें कई आधुनिक सुविधाएं सुलभ थीं। एंबुलेंस के संचालन के लिए सीएमओ कार्यालय की ओर से हर सप्ताह रोस्टर जारी किया जाता था। पिछले कुछ सालों से सचल चिकित्सा वाहन खड़े-खड़े कबाड़ में बदलने लगे हैं। दो से तीन सचल चिकित्सा वाहन क्षय रोग अस्पताल के पास खड़े-खड़े सड़ गए हैं। सरकार और विभाग के उच्चाधिकारियों की उदासीनता के कारण लोगों को सचल चिकित्सा के इस लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग में ड्राइवरों की काफी कमी है। ड्राइवरों की व्यवस्था करने के लिए उच्च स्तर पर प्रपोजल भेजा जाएगा। एंबुलेंस वाहन खराब ना हो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को समय-समय पर वाहन को स्टार्ट करने के निर्देश दिए हैं।
- डॉ. रवि शंकर श्रीवास्तव, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी कनालीछीना।
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