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Pithoragarh News: ईडब्लूएस के माध्यम से आपदाओं को कम करने के लिए समन्वय से दोनों देशों के अधिकारी करेंगे काम

Sun, 06 Sep 2026 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sun, 06 Sep 2026 10:54 PM IST
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Officials from both countries will work collaboratively to mitigate the impact of disasters through Early Warning Systems (EWS)
चंपावत। भारत-नेपाल सीमा पर दोनों देशों के अधिकारी समन्वयक के साथ काम कर प्राकृतिक आपदाओं को कम करने का काम करेंगे, इसके लिए ईडब्लूएस समूह का गठन किया गया है। महाकाली नदी किनारे पिथौरागढ़ जिले के दर्जनों गांवों जुड़े हैं। वहीं पांच नदियों काली, गोरी, धौली, सरयू, रामगंगा नदी के संगम पंचेश्वर क्षेत्र किनारे चंपावत जिले के सिमलौता, डडौरा, भट्याड़, पंथ्यूड़ा, भकूंडा, कपडौत, गंगेश्वरखेत, स्यारा, नखरूघाट, चिलसानी आदि गांव स्थित हैं।
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नेपाल की कई छोटी-बड़ी नदियां ऐसी हैं जो महाकाली नदी में मिलती है। भले ही महाकाली नदी प्रवाहित होते हुए हर जिले में अलग-अलग नाम से जानी जाती है लेकिन जब नदी अपना प्रलय दिखाती है तो नदी किनारे बसे गांव के लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है। कभी नदी के कारण भारतीय गांव प्रभावित होते हैं तो कभी नेपाल सीमा से लगे।
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वहीं पहाड़ में बारिश होती है तो इसका असर पूर्णागिरि, टनकपुर, बनबसा में भी रहता है। जहां इसे शारदा के नाम से जाना जाता है। कुछ समय पूर्व भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में नेपाल के बैतड़ी जिले की प्रमुख जिला अधिकारी मीना अर्याल की पहल के बाद रुडेस संस्था के कार्यकारी निदेशक गोविंद राज जोशी ने वॉट्सऐप पर ट्रांस बाउंड्री अर्ली वॉर्निंग सूचना तंत्र समूह (ईडब्लूएस) का गठन किया है, इसमें भारत के जिला पिथौरागढ़, चंपावत, नेपाल के दार्चुला, बैतड़ी जिले के जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि आदि शामिल हैं जो सूचनाओं का आदान-प्रदान मौखिक और लिखित रूप में कर रहे हैं। समूह का गठन 30 अगस्त को किया गया है।
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पूर्व में आपदा के समय निभाई थी भूमिका
चंपावत। कार्यकारी निदेशक रुडेस संस्था बैतड़ी के गोविंद राज जोशी ने बताया कि वर्ष 2020 में संस्था की पहल और परियोजना के माध्यम से शुरू की गई प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने आपदा के समय-समय पर सूचना के आदान-प्रदान और पूर्व चेतावनी के प्रसार में प्रभावी भूमिका निभाई थी। हालांकि करीब दो वर्षों से समूह निष्क्रिय था और उस समय इसका स्वरूप वर्तमान की तरह व्यापक नहीं था। अब समूह को दोबारा सक्रिय कर अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालन में लाने की पहल की है। यदि सूचना समय पर प्राप्त होकर संबंधित निकायों के माध्यम से तत्काल समुदाय तक पहुंचाई जाएगी तो आपदा बचाव आसान होगा। नेपाल-भारत सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा पूर्व तैयारी, समय पर सूचना आदान-प्रदान और आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। दोनों देशों के समूह को स्थानीय, सुरक्षा निकाय, संचारकर्मी, गैर-सरकारी संस्थाओं और अन्य संबंधित हितधारक निकायों के साझा प्रयास, समन्वय और जिम्मेदारी के रूप में निरंतर सक्रिय, प्रभावी ढंग से संचालित किया जाना आवश्यक है।
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भारत-नेपाल सीमा से कई गांव लगे हुए हैं, जिनके समीप से महाकाली नदी बहती है। नेपाल में भोटेकोशी नदी से हुई आपदा के दौरान जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भारत-नेपाल संयुक्त नेटवर्क का पुनर्गठन किया गया है। समय पर सूचना मिलने से सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित खतरे के प्रति पहले से सतर्कता बरती जा सकेगी और संबंधित अधिकारी तत्काल कार्रवाई कर सकेंगे। -मीना अर्याल, प्रमुख जिला अधिकारी, बैतड़ी जिला, नेपाल


भारत-नेपाल की सीमा को महाकाली और शारदा नदी विभाजित करती हैं और दोनों देशों की सीमा से लगे कई गांव इन नदियों के किनारे स्थित हैं। नेपाल में भोटेकोशी नदी से आई आपदा से हुए नुकसान से हम सर्वविदित हैं। भारत-नेपाल नेटवर्क का पुनर्गठन होने से सीमावर्ती गांवों में प्राकृतिक आपदाओं और नदी से होने वाली क्षति को समय पर सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से कम किया जा सकेगा। त्वरित सूचना मिलने पर दोनों देशों के अधिकारी तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जन-धन के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। -मनीष कुमार, डीएम, चंपावत
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