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नोटा का असर बढ़ा, धमक बनना बाकी

Sat, 04 Feb 2017 10:48 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 04 Feb 2017 10:48 PM IST
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NOTA increased impact, the reality still not
नोटा - फोटो : अमर उजाला

प्रत्याशियों को नकारने के विकल्प नोटा का प्रयोग पहली बार ही काफी कारगर रहा था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिले की चारों विधानसभा सीटों पर जितने मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया, उतने वोट उत्तराखंड क्रांति दल, बहुजन समाज पार्टी, सपा, समेत कई अन्य प्रत्याशी अकेले दम पर नहीं ला पाए। नोटा का विकल्प अपनाने वालों का नंबर जिले में भाजपा, कांग्रेस के बाद तीसरे स्थान पर रहा। इसके बावजूद यह नहीं लगता कि राजनीतिक दल नोटा को गंभीरता से ले रहे हैं।

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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव सुधार के तौर पर नोटा का प्रावधान किया। पिथौरागढ़ जिले की चारों विधानसभाई सीटों पर 3545 मतदाताओं ने नोटा के बटन का प्रयोग किया। मत हासिल के हिसाब से नोटा जिले में तीसरे स्थान पर रहा था। जिले की चारों सीटों से भाजपा को 93935, कांग्रेस को 75723 मत मिले थे। चौथे स्थान पर रही बसपा को 3193 मत प्राप्त हुए। आप को 2083, निर्दलीय सज्जन लाल टम्टा 1834, यूकेडी 1142, भाकपा माले 1066, उपपा 465, सपा को 410 मत मिले। 
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यानि ये दल और प्रत्याशी नोटा को छू भी नहीं पाए। लोकसभा चुनाव में पिथौरागढ़ सीट पर 913, डीडीहाट में 832, धारचूला में 717, गंगोलीहाट में 1083 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। नोटा के ये आंकड़े राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों के प्रदर्शन के लिहाज से कतई उचित नहीं ठहराए जा सकते। लोकसभा चुनाव में जिले में तीसरे स्थान पर नोटा का रहना कई सवाल भले ही खड़े करता हो पर नोटा के प्रति लोगों का झुकाव नेताओं की चिंता बनता फिलहाल दिखाई नहीं देता। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और दलों की समझ में यह कब आएगा कि नोटा का बटन दबाने वाले लोग उन्हें नकार रहे हैं, यह भविष्य ही बताएगा।
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सीएम के चुनाव में भी नोटा का जोर रहा
वर्ष 2014 में हुए धारचूला विधानसभा सीट के उप चुनाव में मुख्यमंत्री हरीश रावत स्वयं चुनाव मैदान में थे। मुख्यमंत्री को 31207, भाजपा के विष्णु दत्त को 10608 मत मिले। 1028 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। तब दो ही प्रत्याशी मैदान में थे। यहां भी नोटा तीसरे स्थान पर रहा।

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