न एसडीएम का पता, नहीं तहसीलदार का
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114 ग्राम पंचायतों की करीब 60 हजार की आबादी की एकमात्र थल तहसील के भी हाल बेहद खराब हैं। यहां न तो एसडीएम का पता है और न ही तहसीलदार का। इसके अलावा स्टाफ भी पूरा नहीं है, जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ता है। युवाओं को भर्ती के लिए जरूरी प्रमाण पत्र बनाने के लिए कई-कई चक्कर काटने पड़ने हैं और अंत में उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। इस तहसील में लगा फर्नीचर भी जीआईसी और सूचना विभाग केंद्र का है।
शनिवार को जब हमने इस नवसृजित थल तहसील की पड़ताल की तो यहां जिम्मेदार अधिकारी के रूप में सिर्फ रजिस्ट्रार कानूनगो ही तैनात मिले। वह भी काम में व्यस्त थे। ठीक दस बजे वह तहसील पहुंच गए थे, स्टाफ की कमी के कारण उन्हें भी लगभग तहसील का सारा कामकाज देखना होता है। वह कंप्यूटर में खुद ही डाक्यूमेंट्स की फीडिंग करते हैं। उनको आनलाइन प्रक्रिया में डालते हैं। वह जैसे ही आफिस पहुंचे तो विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए लोगों का आना शुरू हो गया था। इसके अलावा स्टाफ के नाम होमगार्ड है, जिसे कागजात ढूंढने, फाइल टटोलने का काम करना पड़ता है, जबकि यह काम चपरासी या क्लर्क को करना चाहिए। इसी होमगार्ड पर तहसील को खोलने-बंद करने की जिम्मेदारी भी है। स्थायी एसडीएम नहीं होने से लोगों को काफी दिक्कतें हो रही है। बेड़ीनाग के एसडीएम प्रमोद कुमार को थल तहसील का चार्ज दिया गया है, लेकिन लोगों को उनके न तो यहां आने का पता चलता है और न यहां बैठने का। फिलहाल यहां दो क्लर्क, एक नाजिर, एक संग्रह अमीन और चपरासी की बेहद जरूरत है।