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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   No water in Pithauragarh

सीमांत जिले पिथौरागढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल किल्लत से लोग परेशान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 08 Dec 2020 10:38 PM IST
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No water in Pithauragarh
गंगोलीहाट के चहज में नौलों से पानी भरकर लाते बच्चे। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। पहाड़ों में भरपूर पानी होने के बाद भी पहाड़ के लोगों को पेयजल के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पेयजल के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंगोलीहाट विकासखंड के बेलपट्टी के ग्रामीणों को सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण महिलाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों से लंबी दूरी तय करने के बाद पेयजल का प्रबंध करना पड़ रहा है। नगर मुख्यालय कई वार्डों में लोग पेयजल किल्लत से परेशान हैं, लेकिन इसके बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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गंगोलीहाट विकासखंड के बेलपट्टी क्षेत्र की 27 ग्राम पंचायतें पेयजल किल्लत से परेशान हैं। नाली, टिम्टा, चमडुंगरा, डूनी, चहज, बरकतोली, पीपली, निगल्टी, अस्कोड़ा, खतेड़ा, बडेना, द्विनाटा, ड्यूल, रड़कोट, कोटा, पोखरा, डम्डे, चहज, टुडिल, चौड़ा, धुरौली, पाती पल्याल, सुंगरखोला, बुंगली, सुरखाल, पाठक, भामा, सुगड़ी के लोग परेशान हैं। यहां शादी विवाह आदि समारोह के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी का प्रबंध करना पड़ता है। ग्रामीणों और महिलाओं को पानी के लिए आधा किमी से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। चहज में लोग प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। शादी विवाह आदि समारोह में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुनस्यारी विकासखंड के एक दर्जन से अधिक लोग आधा से एक किमी पैदल चलकर पानी जुटाने को मजबूर हैं। विकासखंड के हरकोट, मालूपाती, मटेना, घोरपट्टा, सेविला, पैकूति गांव में पेयजल की सर्वाधिक दिक्कत है। हरकोट के पूर्व प्रधान खुशाल सिंह का कहना है कि हरकोट में पेयजल लाइनें बिछाई गई हैं लेकिन नलों में कभी-कभी पानी आता है। उनका कहना है कि ग्रामीण आधा किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोतों से मवेशियों और अपने लिए पेयजल का प्रबंध करते हैं। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन योजना के तहत पेयजल के कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन स्रोतों में ही पानी नहीं है तो नलों में कहां से पानी आएगा। मटेना गांव में आपदा में पेयजल योजना ध्वस्त हो गई थी। ग्रामीणों ने यहां पर प्लास्टिक के पाइप लगाकर अस्थाई व्यवस्था की है लेकिन प्लास्टिक की लाइन बार-बार ध्वस्त हो जाती है। इस कारण लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण एक किमी दूर चलकर हरकोट से पानी का प्रबंध करते हैं।
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बारिश न होने से प्राकृतिक जल स्रोतों का गिरने लगा जलस्तर
पिथौरागढ़। लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्राकृतिक जल स्रोतों का जलस्तर काफी गिर गया है। इस कारण लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी भरने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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