2002 के बाद कोई भी तिब्बती व्यापारी भारतीय मंडी नहीं आया
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भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार 25वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। अप्रैल 1992 में जब भारत-तिब्बत व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन के अधिकारियों की पिथौरागढ़ में बैठक हुई थी तब यह तय हुआ था कि भारतीय व्यापारी तकलाकोट और तिब्बती व्यापारी गुंजी आकर व्यापार करेंगे। यह भी कहा गया कि गुंजी में बाकायदा ट्रेड फेयर का आयोजन भी होगा, लेकिन इस व्यापार की सबसे बड़ी विडंबना यही रही कि वर्ष 2002 के बाद कोई भी तिब्बती व्यापारी भारतीय मंडी गुंजी नहीं आया है। इसमें 1992 से 2002 के बीच सिर्फ सात वर्षों के भीतर तिब्बत के 86 व्यापारी ही गुंजी मंडी पहुंचे। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 1992 से 2016 तक 7176 भारतीय व्यापारी तिब्बत की मंडी तकलाकोट जा चुके हैं।
भारत-तिब्बत ट्रेड कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार 1992 में जब भारत-तिब्बत स्थल व्यापार की प्रक्रिया शुरू हुई, तब तिब्बत के 7 व्यापारी गुंजी मंडी पहुंचे थे। 1993 में यह संख्या 12 पहुंची, लेकिन 1994 में तिब्बत का कोई भी व्यापारी गुंजी नहीं आया, जबकि 1995 में गुंजी आने वाले तिब्बती व्यापारियों की संख्या 43 पहुंच गई। यह सबसे ज्यादा संख्या थी। 1996 में तिब्बत के 12, 1999 में 6, 2000 में 4 और 2002 में मात्र 2 व्यापारियों ने भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी में कदम रखा। तब से किसी भी व्यापारी ने भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी आने की जरूरत नहीं समझी।
इसके पीछे एक तर्क यह भी दिया जाता है कि गुंजी में भारतीय व्यापारी सिर्फ अपने गोदाम बनाते हैं। वहां पर व्यापारिक गतिविधियां नहीं होती। भारतीय व्यापारी अपना सारा सामान लेकर तकलाकोट चले जाते हैं। तिब्बत के लोगों को भारतीय सामान तकलाकोट में ही मिल जाता है। दूसरा तर्क यह है कि 25 वर्षों में गुंजी मंडी में सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ। गुंजी में संचार, यातायात के कोई साधन नहीं हैं। इसके विपरीत तकलाकोट में फोरलेन सड़कें, अत्याधुनिक संचार सेवाएं, आलीशान होटल जैसी सुविधाएं हैं।
गुंजी में सुविधाओं के विस्तार की जरूरत
भारत-तिब्बत व्यापार के नामित ट्रेड अधिकारी आरके पांडे और सहायक ट्रेड अधिकारी पीएस कुटियाल का कहना है कि तिब्बत के व्यापारियों को भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी तक लाने के प्रयास किए जाएंगे। गुंजी में सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। यदि धारचूला से गुंजी तक और गुंजी से लिपुलेख दर्रे तक सड़क बन जाती तो गुंजी में भी व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाएंगी।
इस बार एक जून के बाद जमा नहीं होंगे ट्रेड आवेदन
भारत-तिब्बत व्यापार के ट्रेड अधिकारी आरके पांडे ने कहा कि एक जून के बाद ट्रेड आवेदन जमा नहीं होंगे। प्रशासन सारे आवेदनों को जमा कर ट्रेड परमिट तैयार कर लेगा और व्यापारियों को सिस्टम के साथ तिब्बत की मंडी तकलाकोट को रवाना किया जाएगा। सुव्यवस्थित तरीके से व्यापार होने पर व्यापारियों को ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी।