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सड़क बनने के बाद कूटा, जमतड़ी के ग्रामीण को तय करना पड़ रहा है 55 किमी का अतिरिक्त सफर
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कूटा जमतड़ी बाजार सड़क।
- फोटो : PITHORAGARH
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। कूटा, बाजार और जमतड़ी के ग्रामीणों का बाजार अस्कोट है। अस्कोट से गांवों की पैैदल दूरी तीन से चार किलोमीटर है। ग्रामीण एक से डेढ़ घंटे में पैदल चलकर ही बाजार, जमतड़ी, सिरतोली, बसोरा आदि क्षेत्रों से अस्कोट पहुंच जाते थे।
सड़क निर्माण के बाद ग्रामीणों को अस्कोट पहुंचने के लिए पहले डीडीहाट से ओगला फिर अस्कोट पहुंचना पड़ रहा है, जो सफर सड़क बनने से पूर्व एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो जा रहा था अब उसमें तीन से चार घंटे लग रहे हैं।
50-55 किमी की अतिरिक्त दूरी
अस्कोट (पिथौरागढ़)। कूटा, बाजार और जमतड़ी ग्राम पंचायतों में 2500 से अधिक की आबादी है। अधिकतर ग्रामीणों के बैंक खाते अस्कोट के बैंकों में हैं। गांव तक सड़क पहुंचने के बाद भी उन्हें अस्कोट पहुंचने के लिए 50 से 55 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। उन्हें छोटे से कामों के लिए भी 220 रुपये किराया देकर अस्कोट पहुंचना पड़ रहा है। कई बार गाड़ी नहीं मिलने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जौलजीबी से सड़क बनती तो होता फायदा
अस्कोट (पिथौरागढ़)। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जौलजीबी से गांव तक सड़क बनती तो फायदा होता। बताया कि जौलजीबी मोटर पुल से जमतड़ी तक मात्र तीन किलोमीटर में गोरी नदी वार से सड़क सुविधा की मांग को नेताओं ने अनसुना कर दिया। अपने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए अस्कोट बाजार को खत्म किया जा रहा है। जमतड़ी के तोक कनतोली में 30 वनराजि परिवार रहते हैं, जो गाड़ी में बैठने को पैसों की बर्बादी कहते हैं।
बोले ग्रामीण-
सड़क बनने का हमें कोई फायदा नहीं हुआ है। अस्कोट पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। इससे जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। -माधवी देवी, बाजार ग्रामीण।
अस्कोट से हमारे गांव की पैदल दूरी तीन से चार किलोमीटर है। सड़क के रास्ते अस्कोट पहुंचने के लिए 50 से 55 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। -चनी राम मैरूड़ा, ग्रामीण
वर्षों से हमारा बाजार अस्कोट है। आज भी बाजार में छोटे से काम के लिए आने पर पूरा दिन लग जा रहा है। सड़क बनने से हमें कोई फायदा नहीं हुआ है। -शेर सिंह अधिकारी, सेवानिवृत्त सूबेदार।
सड़क जौलजीबी से बनती तो हम 50 रुपये देकर एक घंटे में अस्कोट पहुंच जाते। सड़क बनने के बाद भी पैदल आ रहे हैं। सड़क बनने से कोई फायदा नहीं हुआ है। - रमेश सिंह वनराजि, कनतोली जमतड़ी।
सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों को अस्कोट आना पड़ता है। अगर जौलजीबी से सड़क का निर्माण होता तो लोगों को काफी सहूलियत होती। - तनुज पाल, सामाजिक कार्यकर्ता
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सड़क निर्माण के बाद ग्रामीणों को अस्कोट पहुंचने के लिए पहले डीडीहाट से ओगला फिर अस्कोट पहुंचना पड़ रहा है, जो सफर सड़क बनने से पूर्व एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो जा रहा था अब उसमें तीन से चार घंटे लग रहे हैं।
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50-55 किमी की अतिरिक्त दूरी
अस्कोट (पिथौरागढ़)। कूटा, बाजार और जमतड़ी ग्राम पंचायतों में 2500 से अधिक की आबादी है। अधिकतर ग्रामीणों के बैंक खाते अस्कोट के बैंकों में हैं। गांव तक सड़क पहुंचने के बाद भी उन्हें अस्कोट पहुंचने के लिए 50 से 55 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। उन्हें छोटे से कामों के लिए भी 220 रुपये किराया देकर अस्कोट पहुंचना पड़ रहा है। कई बार गाड़ी नहीं मिलने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जौलजीबी से सड़क बनती तो होता फायदा
अस्कोट (पिथौरागढ़)। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जौलजीबी से गांव तक सड़क बनती तो फायदा होता। बताया कि जौलजीबी मोटर पुल से जमतड़ी तक मात्र तीन किलोमीटर में गोरी नदी वार से सड़क सुविधा की मांग को नेताओं ने अनसुना कर दिया। अपने ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए अस्कोट बाजार को खत्म किया जा रहा है। जमतड़ी के तोक कनतोली में 30 वनराजि परिवार रहते हैं, जो गाड़ी में बैठने को पैसों की बर्बादी कहते हैं।
बोले ग्रामीण-
सड़क बनने का हमें कोई फायदा नहीं हुआ है। अस्कोट पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। इससे जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। -माधवी देवी, बाजार ग्रामीण।
अस्कोट से हमारे गांव की पैदल दूरी तीन से चार किलोमीटर है। सड़क के रास्ते अस्कोट पहुंचने के लिए 50 से 55 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। -चनी राम मैरूड़ा, ग्रामीण
वर्षों से हमारा बाजार अस्कोट है। आज भी बाजार में छोटे से काम के लिए आने पर पूरा दिन लग जा रहा है। सड़क बनने से हमें कोई फायदा नहीं हुआ है। -शेर सिंह अधिकारी, सेवानिवृत्त सूबेदार।
सड़क जौलजीबी से बनती तो हम 50 रुपये देकर एक घंटे में अस्कोट पहुंच जाते। सड़क बनने के बाद भी पैदल आ रहे हैं। सड़क बनने से कोई फायदा नहीं हुआ है। - रमेश सिंह वनराजि, कनतोली जमतड़ी।
सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों को अस्कोट आना पड़ता है। अगर जौलजीबी से सड़क का निर्माण होता तो लोगों को काफी सहूलियत होती। - तनुज पाल, सामाजिक कार्यकर्ता