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सुनहरे भविष्य के लिए खतरों से खेल रहा बचपन
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उफनाई गोरी नदी को ट्राली से पार करते घरूड़ी गांव के स्कूल जाने वाले बच्चे।
- फोटो : PITHORAGARH
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील के घरूड़ी गांव के बच्चे अस्थायी ट्रॉली पर बैठकर उफनाई गोरी नदी पार करके स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। अभिभावक भी बच्चों के भविष्य के लिए अपने कलेजे पर पत्थर रखकर उन्हें स्कूल भेजते हैं और अपने लाल के सकुशल लौटने तक चिंता में डूबे रहते हैं। इसके बावजूद शासन-प्रशासन को बच्चों और अभिभावकों का दर्द नहीं दिख रहा है।
वर्ष 2020 में गोरी नदी के उफान पर आने से घरूड़ी गांव को जोड़ने वाली ट्रॉली क्षतिग्रस्त हो गई थी। नदी पर निर्माणाधीन पुल के अपरमेंट भी बह गए थे। ग्रामीण ने पुल और ट्रॉली निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, जब सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने चंदा करके क्षतिग्रस्त ट्रॉली को सही कराया। स्कूल खुलने पर गांव के करीब 10 बच्चे इसी ट्रॉली के जरिये नदी पार करके बंगापानी और बरम के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं।
गांव के दलीप चंद, हरीश सिंह, नंदन सिंह, पुष्कर सिंह, गणेश सिंह, मोती सिंह और नरेंद्र सिंह का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजना जरूरी है। कोई अनहोनी न घटे इसलिए वह अपनी मौजूदगी में ही बच्चों को ट्रॉली के सहारे नदी पार कराते हैं।
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कहते हैं कि जब-तक बच्चे ट्रॉली से सही सलामत उतर नहीं जाते उनकी जान हलक में अटकी रहती है और घरों में बच्चों की मां चिंता में डूबी रहती हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से नदी पर अति शीघ्र पुल का निर्माण कराने की मांग की है।
बच्चे बोले-लगता है डर
उफनाई हुई गोरी नदी को ट्रॉली से पार करने में काफी डर लगता है। पढ़ाई के कारण खतरों से खेलना पड़ रहा है। सरकार को शीघ्र पक्के पुल का निर्माण करना चाहिए। - गौरव चंद, छात्र
स्कूल जाना जरूरी है लेकिन ट्रॉली से नदी पार करने में डर लगता है। घर पहुंचने तक माता-पिता भी डरे रहते हैं। सरकार को हमारी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। -दीपा, छात्रा
लंबे समय से हम लोग पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। अगर भविष्य में कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पूरी तरह सरकार और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। - प्रिया, छात्रा
भारी बारिश के कारण गोरी नदी उफान पर है। सरकार को शीघ्र पक्का पुल बनाना चाहिए। ताकि बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग और अन्य लोगों को राहत मिल सके। -विनीता, छात्रा
उफनाई रामगंगा पार करने की मजबूरी
पिथौरागढ़। रामगंगा नदी में बना झूलापुल वर्ष 2018 में बह गया था। इसके बाद बागेश्वर जिले के कालचौरा, कभाड़ी, खेती, किसमिला, भल्यूड़ी, चेटाबगड़, ल्वैटा और मसकोट न्याय पंचायत के 100 से अधिक बच्चे उफनाई गोरी नदी पार करके जीआईसी नाचनी पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
धारचूला के गलाती, रमतोली, खुमती, बजानी गांव के बच्चे भी उफनाते गाड़ गधेरे पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने शीघ्र अस्थायी पुल बनाने की मांग की है।
हम लोग लंबे समय से यहां पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन भाजपा सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। कांग्रेस काल में स्वीकृत पुल और सड़क के निर्माण भी भाजपा के शासन में रुक गए हैं। इस मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा।
- हरीश धामी विधायक
बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। बच्चे देश का भविष्य हैं इस मामले को सीएम के सामने उठाया जाएगा। तत्काल प्रभाव से पुल बनाना चाहिए।
- स्वामी वीरेंद्रानंद महामंडलेश्वर, दशनाम जूना अखाड़ा। (भाजपा नेता)
गाड़-गधेरे और नदियां पार कर स्कूल पहुंच रहे सैकड़ों बच्चे
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के दो दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे उफनाते गाड़ गधेरे और नदियां पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। वर्षाकाल में गाड़ गधेरों और नदियों का जल स्तर बढ़ने के कारण कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। लंबे समय से इन गांवों के लोग पक्के पुलों का निर्माण करने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी पक्के पुलों के निर्माण को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इन उफनाते नालों में अगर कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार शासन-प्रशासन होगा। कोरोना के कहर के बाद संक्रमण के कम मामले देखते हुए सरकार ने स्कूलों को खोल दिया है।
लंबे समय बाद स्कूल खुलने से उत्साहित बच्चों की राह में बारिश की वजह से उफनाए नदी-नाले और गाड़-गधेरे रोड़ा बन रहे हैं। आपदा प्रभावित तांगा गांव के 15 से 20 बच्चे सेरघटिया नदी पार कर सेनी और दानीबगड़ पहुंच रहे हैं।
बंगापानी तहसील के मनकोट, घरूड़ी, भ्यौला के करीब 20 बच्चे गोरी नदी में ट्रॉली पार कर पढ़ने बंगापानी आ रहे हैं। हुड़की बगड़ के बच्चे भी गोरी नदी पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
मुनस्यारी विकासखंड के चेटी चिमला, घटधार और बर्नियागांव गांव के बच्चे बर्नियागांव के पास उफनाता गधेरा पार कर ज्ञान अर्जित करने जीआईसी नमजला और रांथी के विद्यालय में आ रहे हैं। यहां चार साल पूर्व गधेरा पार करते समय एक बच्ची की मौत हो गई थी। इसके बाद भी शासन-प्रशासन को अभिभावकों का दर्द नहीं दिख रहा है।
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वर्ष 2020 में गोरी नदी के उफान पर आने से घरूड़ी गांव को जोड़ने वाली ट्रॉली क्षतिग्रस्त हो गई थी। नदी पर निर्माणाधीन पुल के अपरमेंट भी बह गए थे। ग्रामीण ने पुल और ट्रॉली निर्माण के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, जब सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने चंदा करके क्षतिग्रस्त ट्रॉली को सही कराया। स्कूल खुलने पर गांव के करीब 10 बच्चे इसी ट्रॉली के जरिये नदी पार करके बंगापानी और बरम के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं।
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गांव के दलीप चंद, हरीश सिंह, नंदन सिंह, पुष्कर सिंह, गणेश सिंह, मोती सिंह और नरेंद्र सिंह का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजना जरूरी है। कोई अनहोनी न घटे इसलिए वह अपनी मौजूदगी में ही बच्चों को ट्रॉली के सहारे नदी पार कराते हैं।
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कहते हैं कि जब-तक बच्चे ट्रॉली से सही सलामत उतर नहीं जाते उनकी जान हलक में अटकी रहती है और घरों में बच्चों की मां चिंता में डूबी रहती हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से नदी पर अति शीघ्र पुल का निर्माण कराने की मांग की है।
बच्चे बोले-लगता है डर
उफनाई हुई गोरी नदी को ट्रॉली से पार करने में काफी डर लगता है। पढ़ाई के कारण खतरों से खेलना पड़ रहा है। सरकार को शीघ्र पक्के पुल का निर्माण करना चाहिए। - गौरव चंद, छात्र
स्कूल जाना जरूरी है लेकिन ट्रॉली से नदी पार करने में डर लगता है। घर पहुंचने तक माता-पिता भी डरे रहते हैं। सरकार को हमारी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। -दीपा, छात्रा
लंबे समय से हम लोग पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। अगर भविष्य में कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पूरी तरह सरकार और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। - प्रिया, छात्रा
भारी बारिश के कारण गोरी नदी उफान पर है। सरकार को शीघ्र पक्का पुल बनाना चाहिए। ताकि बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग और अन्य लोगों को राहत मिल सके। -विनीता, छात्रा
उफनाई रामगंगा पार करने की मजबूरी
पिथौरागढ़। रामगंगा नदी में बना झूलापुल वर्ष 2018 में बह गया था। इसके बाद बागेश्वर जिले के कालचौरा, कभाड़ी, खेती, किसमिला, भल्यूड़ी, चेटाबगड़, ल्वैटा और मसकोट न्याय पंचायत के 100 से अधिक बच्चे उफनाई गोरी नदी पार करके जीआईसी नाचनी पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
धारचूला के गलाती, रमतोली, खुमती, बजानी गांव के बच्चे भी उफनाते गाड़ गधेरे पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने शीघ्र अस्थायी पुल बनाने की मांग की है।
हम लोग लंबे समय से यहां पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन भाजपा सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। कांग्रेस काल में स्वीकृत पुल और सड़क के निर्माण भी भाजपा के शासन में रुक गए हैं। इस मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा।
- हरीश धामी विधायक
बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। बच्चे देश का भविष्य हैं इस मामले को सीएम के सामने उठाया जाएगा। तत्काल प्रभाव से पुल बनाना चाहिए।
- स्वामी वीरेंद्रानंद महामंडलेश्वर, दशनाम जूना अखाड़ा। (भाजपा नेता)
गाड़-गधेरे और नदियां पार कर स्कूल पहुंच रहे सैकड़ों बच्चे
पिथौरागढ़। सीमांत जिले के दो दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे उफनाते गाड़ गधेरे और नदियां पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं। वर्षाकाल में गाड़ गधेरों और नदियों का जल स्तर बढ़ने के कारण कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। लंबे समय से इन गांवों के लोग पक्के पुलों का निर्माण करने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी पक्के पुलों के निर्माण को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इन उफनाते नालों में अगर कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार शासन-प्रशासन होगा। कोरोना के कहर के बाद संक्रमण के कम मामले देखते हुए सरकार ने स्कूलों को खोल दिया है।
लंबे समय बाद स्कूल खुलने से उत्साहित बच्चों की राह में बारिश की वजह से उफनाए नदी-नाले और गाड़-गधेरे रोड़ा बन रहे हैं। आपदा प्रभावित तांगा गांव के 15 से 20 बच्चे सेरघटिया नदी पार कर सेनी और दानीबगड़ पहुंच रहे हैं।
बंगापानी तहसील के मनकोट, घरूड़ी, भ्यौला के करीब 20 बच्चे गोरी नदी में ट्रॉली पार कर पढ़ने बंगापानी आ रहे हैं। हुड़की बगड़ के बच्चे भी गोरी नदी पार कर स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
मुनस्यारी विकासखंड के चेटी चिमला, घटधार और बर्नियागांव गांव के बच्चे बर्नियागांव के पास उफनाता गधेरा पार कर ज्ञान अर्जित करने जीआईसी नमजला और रांथी के विद्यालय में आ रहे हैं। यहां चार साल पूर्व गधेरा पार करते समय एक बच्ची की मौत हो गई थी। इसके बाद भी शासन-प्रशासन को अभिभावकों का दर्द नहीं दिख रहा है।