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बस्तड़ी में दिवाली की कोई तैयारी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Tue, 25 Oct 2016 10:27 PM IST
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बस्तड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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आपदा प्रभावित बस्तड़ी गांव में दिवाली की कोई तैयारी नहीं हो रही है। लोगों के चेहरों पर मायूसी है। 30 जून की रात आपदा की भेंट चढ़ चुके मकानों को लोग उसी दिन छोड़कर आ गए थे। अब इन मकानों में कोई नहीं रहता। लोग जीआईसी में बनाए गए राहत कैंप और किराए के मकानों में रह रहे हैं। अब तक पक्के मकान बनने की आस भी कम होती जा रही है।
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लोगों का कहना है कि दिवाली के समय घरों की साफ-सफाई, सजावट की जाती थी। पिछले साल तक दिवाली से करीब दो सप्ताह पहले से घरों की सफाई शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार किसी ने भी घर की सफाई के लिए एक डिब्बा रंग का तक नहीं खरीदा है। लोग कहते हैं कि दिवाली की रात कुछ दीये जरूर जलाएंगे, लेकिन वह भी मृतकों की आत्मा की शांति के लिए होंगे। बस्तड़ी हादसे में 21 लोगों की मौत हुई थी और छह लोग घायल हुए थे। बस्तड़ी में नए मकान नहीं बनने के कारण अब तक 14 परिवार यहां से छोड़कर अन्य शहरों में जा चुके हैं।
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बस्तड़ी के लोगों की बाजार सिंघाली में है। वहां के व्यापारियों का कहना है कि इस बार बस्तड़ी का कोई भी व्यक्ति घर की सजावट का कोई भी सामान लेकर नहीं जा रहा है। इस बार बस्तड़ी के युवा अस्कोट और डीडीहाट में चल रही रामलीला देखने भी नहीं जा रहे हैं।
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व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा
बस्तड़ी निवासी शंकर दत्त भट्ट की सिंघाली में दुकान है। वह कहते हैं कि इस बार बस्तड़ी के लोग दिवाली की खरीदारी के लिए नहीं आ रहे हैं। इसका असर व्यवसाय पर पड़ रहा है। वह कहते हैं कि बस्तड़ी के लोग काफी पहले से खरीदारी को आ जाते थे, लेकिन इस बार सन्नाटा है। वैसे भी उन्होंने दुकान में दिवाली का कम ही सामान रखा है।
दिवाली में उल्लास हो भी कैसे
बस्तड़ी निवासी युवा विनीत भट्ट का कहना है कि आपदा से बुरी तरह त्रस्त बस्तड़ी गांव में दिवाली के उल्लास की उम्मीद नहीं की जा सकती। हर घर का कोई न कोई सदस्य हादसे का शिकार हुआ था। ऐसे में दिवाली धूमधाम से मनाने का सवाल ही नहीं उठता। बस थोड़ा सा औपचारिकता निभा लेंगे।
सरकार ने पीड़ितों को मायूस किया
बस्तड़ी निवासी प्रदीप भट्ट का कहना है कि सरकार ने ज्यादा मायूस किया है। पक्के मकान बनाने की घोषणा करते समय ऐसा लगा कि जैसे मकान जल्दी तैयार हो जाएंगे, लेकिन चार महीने बीतने को हैं एक भी पक्का मकान अब तक नहीं बना है। वह कहते हैं कि हर घर उजड़ा है। ऐसे में दिवाली को मनाने का सवाल नहीं उठता।
दिवाली के लिए कोई तैयारी नहीं
बस्तड़ी निवासी योगेश भट्ट का कहना है कि पिछले साल तक दिवाली में खूब जश्न होता था। हर परिवार अपने मकान को बेहतरीन ढंग से सजाता था। इस बार ऐसी कोई तैयारी नहीं है। सिर्फ अपनों को खोने का गम हर वक्त सताता है। वह कहते हैं कि यदि अब तक नए मकान बन गए होते तो शायद लोग उनकी सजावट कर लेते।