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बेटे को आईटीआई में प्रवेश दिलाने के लिए की नसबंदी, फरवरी माह से अब तक नहीं मिला पैसा
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पिथौरागढ़। बेटे को आईटीआई में प्रवेश दिलाने के लिए अस्कोट के एक दिव्यांग पिता ने नसबंदी करा दी, लेकिन नौ माह बाद भी स्वास्थ्य विभाग से उन्हें एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी। इसके लिए दिव्यांग स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काटते थक चुका है।
बच्चों को पढ़ाकर उनका जीवन खुशहाल बनाने की उम्मीद हर माता-पिता करते हैं। इसी उम्मीद को साकार करने के लिए अस्कोट निवासी दिव्यांग जगदीश सिंह कुंवर ने बेटे गौरव कुंवर को आईटीआई में प्रवेश दिलाया। इसका शुल्क जमा करवाने के लिए 22 फरवरी 2020 में जिला अस्पताल में नसबंदी करवाई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से उन्हें प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है। जगदीश 30 अप्रैल 2018 को पेड़ से चारा काटते समय करंट लगने से घायल हो गए थे। इस हादसे में उन्हें एक पैर गंवाना पड़ा। वह दो साल से प्लास्टिक के पैर और बैसाखी के सहारे चलने को मजबूर हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब
पिथौरागढ़। जगदीश सिंह कुंवर के परिवार की माली हालत बहुत खराब है। करंट लगने के बाद जगदीश के दिव्यांग होने के कारण उनकी पत्नी मीना कुंवर मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती हैं। उनका बेटा गौरव कुंवर अस्कोट से आईटीआई कर रहा है और बेटी योगिता 10वीं कक्षा में पढ़ रही है। जगदीश ने बताया कि उन्हें समाज कल्याण विभाग से एक हजार रुपये की पेंशन मिलती है लेकिन उससे परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा है।
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नसबंदी की प्रोत्साहन राशि न मिलने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। शीघ्र ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करवा जगदीश सिंह कुंवर को राशि का भुगतान किया जाएगा।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।
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बच्चों को पढ़ाकर उनका जीवन खुशहाल बनाने की उम्मीद हर माता-पिता करते हैं। इसी उम्मीद को साकार करने के लिए अस्कोट निवासी दिव्यांग जगदीश सिंह कुंवर ने बेटे गौरव कुंवर को आईटीआई में प्रवेश दिलाया। इसका शुल्क जमा करवाने के लिए 22 फरवरी 2020 में जिला अस्पताल में नसबंदी करवाई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से उन्हें प्रोत्साहन राशि नहीं मिल सकी है। जगदीश 30 अप्रैल 2018 को पेड़ से चारा काटते समय करंट लगने से घायल हो गए थे। इस हादसे में उन्हें एक पैर गंवाना पड़ा। वह दो साल से प्लास्टिक के पैर और बैसाखी के सहारे चलने को मजबूर हैं।
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परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब
पिथौरागढ़। जगदीश सिंह कुंवर के परिवार की माली हालत बहुत खराब है। करंट लगने के बाद जगदीश के दिव्यांग होने के कारण उनकी पत्नी मीना कुंवर मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करती हैं। उनका बेटा गौरव कुंवर अस्कोट से आईटीआई कर रहा है और बेटी योगिता 10वीं कक्षा में पढ़ रही है। जगदीश ने बताया कि उन्हें समाज कल्याण विभाग से एक हजार रुपये की पेंशन मिलती है लेकिन उससे परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा है।
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नसबंदी की प्रोत्साहन राशि न मिलने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। शीघ्र ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करवा जगदीश सिंह कुंवर को राशि का भुगतान किया जाएगा।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।