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शिक्षा के मंदिर तक पहुंचाने वाली लाइफलाइन गोरी बहा ले गई, पार जाना है मुश्किल
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पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी तहसील के घुरुड़ी क्षेत्र में गोरी नदी किनारे गरारी से स्कूल जाते ब?
- फोटो : PITHORAGARH
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील के आपदा प्रभावित घुरुड़ी के लोगों को हर साल आपदा की मार झेलनी पड़ती है। गोरी नदी पर बनी गरारी के बीते दिनों नदी में समाने के कारण स्कूली बच्चों को कई किमी दूर स्थित दूसरी गरारी से नदी पार करना पड़ रही है। इसमें उनका समय तो बर्बाद हो ही रहा है, पैदल आवाजाही के कारण थके बच्चे स्कूल में सही से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं।
कुछ माह पूर्व आई आपदा में लुमती में गोरी नदी पर बनी गरारी और अस्थायी पुल बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने निजी संसाधनों से गरारी लगाई। लुमती में स्थित इस गरारी से लोग गोरी पार कर घुरुड़ी गांव आते थे। 17 अक्तूबर को हुई बारिश के बाद गोरी नदी के उफान पर आने के कारण लुमती में स्थित गरारी 18 अक्तूबर को नदी में समा गई। इस कारण गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी गरारी आठ से 10 किमी दूर पर सेरा में है। घुरुड़ी के बच्चों को इंटर कॉलेज बगीचाबगड़ आने के लिए पैदल दूरी कर सेरा आना पड़ता है। यहां से फिर ये वह गरारी से नदी पार कर स्कूल जाते हैं। अब यही गरारी ही क्षेत्र के लोगों की लाइफ लाइन है। अगर ये भी क्षतिग्रस्त हो गई तो पूरे क्षेत्र का संपर्क देश से टूट जाएगा।
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क्षेत्र के लोग लगातार आपदा का दंश झेलते रहते हैं। एक मात्र लाइफलाइन गरारी बह जाने से आवाजाही मुश्किल हो गई है। राशन लाना भी मुश्किल हो रहा है। -दिलीप चंद, सामाजिक कार्यकर्ता
हर साल आपदा से गरारी और अस्थायी पुल गोरी नदी में समा जाता है। स्थायी व्यवस्था की जाती है तो शायद आपदा की मार नहीं पड़ती। कई बार हालात मुश्किल हो जाता है। -गंभीर सिंह, स्थानीय ग्रामीण
गरारी बहने के कारण आठ से 10 किमी की यात्रा कर मनकोट पहुंचना पड़ता है। रास्ते भी आपदा से ध्वस्त हैं। वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। बहुत परेशानी होती है। -गौरव चंद, छात्र
क्षेत्र में जब भी आपदा आती है तो शिक्षा पर इसका विपरीत असर पड़ता है। कई बार तो स्कूल भी जाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में हम लोगों का पढ़ना मुश्किल हो जाता है। -दीपा चंद, छात्रा
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कुछ माह पूर्व आई आपदा में लुमती में गोरी नदी पर बनी गरारी और अस्थायी पुल बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने निजी संसाधनों से गरारी लगाई। लुमती में स्थित इस गरारी से लोग गोरी पार कर घुरुड़ी गांव आते थे। 17 अक्तूबर को हुई बारिश के बाद गोरी नदी के उफान पर आने के कारण लुमती में स्थित गरारी 18 अक्तूबर को नदी में समा गई। इस कारण गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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दूसरी गरारी आठ से 10 किमी दूर पर सेरा में है। घुरुड़ी के बच्चों को इंटर कॉलेज बगीचाबगड़ आने के लिए पैदल दूरी कर सेरा आना पड़ता है। यहां से फिर ये वह गरारी से नदी पार कर स्कूल जाते हैं। अब यही गरारी ही क्षेत्र के लोगों की लाइफ लाइन है। अगर ये भी क्षतिग्रस्त हो गई तो पूरे क्षेत्र का संपर्क देश से टूट जाएगा।
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क्षेत्र के लोग लगातार आपदा का दंश झेलते रहते हैं। एक मात्र लाइफलाइन गरारी बह जाने से आवाजाही मुश्किल हो गई है। राशन लाना भी मुश्किल हो रहा है। -दिलीप चंद, सामाजिक कार्यकर्ता
हर साल आपदा से गरारी और अस्थायी पुल गोरी नदी में समा जाता है। स्थायी व्यवस्था की जाती है तो शायद आपदा की मार नहीं पड़ती। कई बार हालात मुश्किल हो जाता है। -गंभीर सिंह, स्थानीय ग्रामीण
गरारी बहने के कारण आठ से 10 किमी की यात्रा कर मनकोट पहुंचना पड़ता है। रास्ते भी आपदा से ध्वस्त हैं। वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है। बहुत परेशानी होती है। -गौरव चंद, छात्र
क्षेत्र में जब भी आपदा आती है तो शिक्षा पर इसका विपरीत असर पड़ता है। कई बार तो स्कूल भी जाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में हम लोगों का पढ़ना मुश्किल हो जाता है। -दीपा चंद, छात्रा