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कोरोना के कारण मुनस्यारी के होटलों टीआरसी की 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द
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लंबे समय से बारिश नहीं होने और जंगलों में लग रही आग से पूरे पहाड़ में धुंध छायी है। धुंध के कारण पि?
- फोटो : PITHORAGARH
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण होटल और पर्यटक आवास गृहों की 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई है। लॉकडाउन के दौरान भारी नुकसान झेल चुके पर्यटन कारोबारी निराश हो गए हैं। यदि कोरोना की रफ्तार नहीं थमी तो पर्यटन कारोबार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा।
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बाहरी राज्यों से यहां आने पर्यटकों के लिए 72 घंटे पहले की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य किया गया है। इससे होटलों की बुकिंग रद्द होने लगीं हैं। अप्रैल में टीआरसी समेत अन्य होटलों में लगभग 40 से 50 प्रतिशत बुकिंग हुई थी। उनमें से टीआरसी में भी 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई हैं।
मुनस्यारी के सरमोली स्थित होम स्टे में भी लगभग 15 बुकिंग थीं। मिलम-जोहार ट्रैक पर जाने वाले ट्रैकरों ने होम स्टे बुक किया था। कोरोना के कारण पूरी बुकिंग रद्द हो गई है। कोरोना महामारी में हुए लॉकडाउन के बाद मुनस्यारी स्थित पर्यटन व्यवसायियों में हालात सुधरने की कुछ आस जगी थी लेकिन अब बढ़ते मामलों ने सभी के माथों पर चिंता की लकीर डाल दी है।
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लॉकडाउन के बाद इस समय पर्यटक आ रहे थे। एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने से बुकिंग रद्द होने लगी है। टीआरसी मुनस्यारी में जिन पर्यटकों ने कमरे बुक कराए थे उनमें से 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई हैं।
- षष्ठी बल्लभ भट्ट, टीआरसी प्रबंधक मुनस्यारी।
इस समय केवल 30 प्रतिशत ही पर्यटकों की बुकिंग है। एहतियात के तौर पर जो पर्यटक बुकिंग करा रहे हैं, उन्हें 72 घंटे पहले की कोरोना जांच रिपोर्ट साथ में लाने की अनिवार्यता से भी बता रहे हैं।
- पूरन पांडेय, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन मुनस्यारी।
धुंध से दृश्यता हुई 500 मीटर, ओझल हुआ हिमालय
पिथौरागढ़। बारिश न होने से वातावरण में इस समय धुंध छा गई है। पिथौरागढ़ जिले में धुंध के कारण 500 मीटर से दूर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। धुंध के चलते हिमालय भी सुबह ही नजरों से ओझल हो जा रहा है।
मुनस्यारी आने वाले पर्यटक यहां से बेहद नजदीक और खूबसूरत दिखायी देने वाले हिमालय और वादियों का दीदार करने आते हैं, लेकिन धुंध से हिमालय नजर न आने के कारण पर्यटकों को घोर निराशा का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटकों की संख्या में कमी आने का एक कारण वातावरण में धुंध भी है।
धुंध का कारण बारिश न होने और जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाएं हैं। बारिश न होने और जंगलों में लग रही आग के कारण जल स्रोतों पर भी खतरा मंडरा रहा है। तापमान बढ़ने से जल संकट भी गहराने लगा है। हालात यह हैं कि कई जल स्रोतों में पानी कम हो चुका है।
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कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बाहरी राज्यों से यहां आने पर्यटकों के लिए 72 घंटे पहले की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य किया गया है। इससे होटलों की बुकिंग रद्द होने लगीं हैं। अप्रैल में टीआरसी समेत अन्य होटलों में लगभग 40 से 50 प्रतिशत बुकिंग हुई थी। उनमें से टीआरसी में भी 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई हैं।
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मुनस्यारी के सरमोली स्थित होम स्टे में भी लगभग 15 बुकिंग थीं। मिलम-जोहार ट्रैक पर जाने वाले ट्रैकरों ने होम स्टे बुक किया था। कोरोना के कारण पूरी बुकिंग रद्द हो गई है। कोरोना महामारी में हुए लॉकडाउन के बाद मुनस्यारी स्थित पर्यटन व्यवसायियों में हालात सुधरने की कुछ आस जगी थी लेकिन अब बढ़ते मामलों ने सभी के माथों पर चिंता की लकीर डाल दी है।
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लॉकडाउन के बाद इस समय पर्यटक आ रहे थे। एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने से बुकिंग रद्द होने लगी है। टीआरसी मुनस्यारी में जिन पर्यटकों ने कमरे बुक कराए थे उनमें से 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई हैं।
- षष्ठी बल्लभ भट्ट, टीआरसी प्रबंधक मुनस्यारी।
इस समय केवल 30 प्रतिशत ही पर्यटकों की बुकिंग है। एहतियात के तौर पर जो पर्यटक बुकिंग करा रहे हैं, उन्हें 72 घंटे पहले की कोरोना जांच रिपोर्ट साथ में लाने की अनिवार्यता से भी बता रहे हैं।
- पूरन पांडेय, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन मुनस्यारी।
धुंध से दृश्यता हुई 500 मीटर, ओझल हुआ हिमालय
पिथौरागढ़। बारिश न होने से वातावरण में इस समय धुंध छा गई है। पिथौरागढ़ जिले में धुंध के कारण 500 मीटर से दूर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। धुंध के चलते हिमालय भी सुबह ही नजरों से ओझल हो जा रहा है।
मुनस्यारी आने वाले पर्यटक यहां से बेहद नजदीक और खूबसूरत दिखायी देने वाले हिमालय और वादियों का दीदार करने आते हैं, लेकिन धुंध से हिमालय नजर न आने के कारण पर्यटकों को घोर निराशा का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटकों की संख्या में कमी आने का एक कारण वातावरण में धुंध भी है।
धुंध का कारण बारिश न होने और जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाएं हैं। बारिश न होने और जंगलों में लग रही आग के कारण जल स्रोतों पर भी खतरा मंडरा रहा है। तापमान बढ़ने से जल संकट भी गहराने लगा है। हालात यह हैं कि कई जल स्रोतों में पानी कम हो चुका है।