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वनराजियों के दिन बहुरने की कोशिशें नहीं

Tue, 11 Dec 2018 10:42 PM IST
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट Updated Tue, 11 Dec 2018 10:42 PM IST
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No efforts to expand on the days of forests
अस्कोट के कंतोली गांव के वनराजि - फोटो : अमर उजाला

वनराजियों के दिन बहुरने की कोशिशें धरातल पर नहीं उतर रही हैं। यह लोग भले ही आम समाज में घुल-मिल गए हों, लेकिन इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

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जमतड़ी ग्राम पंचायत के कंतोली में वनराजियों के 30 परिवार रहते हैं। इनकी जनसंख्या 145 है। पुरातन काल से वनराजि काष्ठ उद्योग पर निर्भर हैं। लकड़ी की घरेलू आवश्यकता की वस्तुएं बनाकर यह लोग जीवन यापन करते थे। वन अधिनियम के कारण जंगलों के विदोहन पर लगी रोक के कारण इन लोगों को अब पर्याप्त मात्रा में लकड़ी उपलब्ध नहीं हो पाती।
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इमारती लकड़ी के चिरान का काम यह लोग करते थे। आरामशीन और अन्य आधुनिक तकनीक आने के बाद लकड़ी चिरान के काम में भी मंदी आ गई। 30 परिवारों में से एक भी व्यक्ति सरकारी अथवा प्राइवेट सेक्टर में नौकरी में नहीं है।
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घट गया भोजन
वनराजि गाड़, गधेरों में मछलियां मारकर भूख मिटाते थे। गाड़, गधेरों में मछलियों की घटती संख्या और मछली मारने पर लगी रोक ने यह भोजन भी वनराजियों से छीन लिया। वनराजि बताते हैं कि जंगलों से कंदमूल फल मिल जाया करते थे। अब जंगली जानवरों के लिए ही कंदमूल फल पर्याप्त नहीं होते। गरीबी के कारण वनराजियों के बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

जमीन का मालिकाना हक भी नहीं
वनराजि परिवार भूमि पर मालिकाना हक नहीं मिलने से खासे परेशान हैं। गांव में पानी के संकट ने उन्हें और परेशानी में डाल दिया है। गांव के लोग बताते हैं कि 15 वर्ष पहले बिरतोली-कंतोली पेयजल योजना बनी, लेकिन योजना को स्रोत से नहीं जोड़ा गया। लोगों को संयोजन भी नहीं मिले हैं। लगभग 20 साल पहले सभी परिवारों को आवास आवंटित किए गए। कम धनराशि के कारण मकान सही नहीं बन पाए। जमतड़ी के प्रधान गोविंद सिंह भंडारी कहते हैं कि कंतोली गांव की पेयजल योजना में पानी चलाने के लिए कई बार विभाग से कहा जा चुका है। अस्थायी रूप से पेयजल लाइन में पानी चलाया गया है।

जमीन का मालिकाना हक तो दे सरकार
कंतोली गांव के वनराजि धरम सिंह कहते हैं कि जिस जमीन पर वह लोग दशकों से रह रहे हैं, उस पर मालिकाना हक तो सरकार को देना चाहिए। मालिकाना हक न होने से वह लोग कई लाभों से वंचित हैं।

मनरेगा से अलावा कोई रोजगार नहीं
वनराजि सुरमा देवी कहती हैं कि कंतोली गांव के 30 परिवारों के पास वर्तमान समय में मनरेगा के अलावा कोई काम नहीं है। अब मनरेगा में भी कम काम आता है। सरकार को रोजगार के साधन उपलब्ध कराने चाहिए।


सरकार वनराजियों के उत्थान के लिए कौशल विकास के जरिये स्वरोजगार का प्रशिक्षण देने जा रही है। जल्द ही एक टीम वनराजियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सर्वेक्षण करेगी। -विशन सिंह चुफाल, क्षेत्रीय विधायक।

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