{"_id":"61c768f45287a449883d6b6c","slug":"new-book-on-kumauni-lokkatha-pithoragarh-news-hld448842156","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकट से गुजर रही लोक कथाओं को बचाने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकट से गुजर रही लोक कथाओं को बचाने की जरूरत
विज्ञापन
पिथौरागढ़ जिला सूचना कार्यालय सभागार में पुस्तक का विमोचन के दौरान मौजूद लोग। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में कुमाऊं की लोक कथाएं पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार प्रेम पुनेठा ने कहा कि आज जिस तरह से नई पीढ़ी स्मार्ट फोन से चिपकी है। दादी-नानियों की कहानियां सुनने के प्रति उनकी रुचि कम हो रही है। कहा कि ऐसी परिस्थितियों में लोककथाओं के साथ ही लोक बोलियां भी खत्म होती चली जाएंगी, जिन्हें बचाने के गंभीर प्रयास करने होंगे।
शनिवार को जिला सूचना विभाग सभागार में पुस्तक का विमोचन किया गया। वरिष्ठ लेखक एवं शिक्षाविद पदमा दत्त पंत ने कहा कि कुमाऊंनी समाज की तरह देश-दुनिया के हर समाज में अपनी लोक कथाएं होती हैं। साहित्यकार महेश पुनेठा ने कहा कि लोक कथाएं न केवल एक सामाजिक परिवेश से जुड़ी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों को हस्तांतरित करती हैं। हिमाल प्रसंग के संपादक प्रकाश पांडेय ने कहा कि इस पुस्तक में प्रकाशित कहानियों को आधार बनाकर लघु फिल्में भी बनाई जा सकती हैं।
पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के सचिव नवीन कोठारी ने कहा कि कई लोककथाएं बेहद रोचक हैं और बच्चों में अपनी संस्कृति को लेकर साहित्यिक अभिरुचि बढ़ाने में सहायक हैं। पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयवर्धन उप्रेती, कुमाऊंनी लेखिका सरस्वती कोहली, सामाजिक कार्यकर्ता बबीता पुनेठा आदि ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
आयोजक संस्था हिमाल प्रकाशन और अभिलाषा समिति की ओर से किशोर पंत ने लोगों का आभार जताया। नन्हीं चौपाल के संपादक विप्लव भट्ट ने संचालन किया। कार्यक्रम में पत्रकार कुंडल चौहान, रमेश गड़कोटी, राजेश पंगरिया, नरेश कांडपाल, सुशील खत्री, प्रकाश पांडेय, विपिन गुप्ता, लेखक प्रकाश पुनेठा, एनको संस्था के ललित पंत, रमेश शर्मा आदि रहे।
विज्ञापन
शनिवार को जिला सूचना विभाग सभागार में पुस्तक का विमोचन किया गया। वरिष्ठ लेखक एवं शिक्षाविद पदमा दत्त पंत ने कहा कि कुमाऊंनी समाज की तरह देश-दुनिया के हर समाज में अपनी लोक कथाएं होती हैं। साहित्यकार महेश पुनेठा ने कहा कि लोक कथाएं न केवल एक सामाजिक परिवेश से जुड़ी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों को हस्तांतरित करती हैं। हिमाल प्रसंग के संपादक प्रकाश पांडेय ने कहा कि इस पुस्तक में प्रकाशित कहानियों को आधार बनाकर लघु फिल्में भी बनाई जा सकती हैं।
विज्ञापन
पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के सचिव नवीन कोठारी ने कहा कि कई लोककथाएं बेहद रोचक हैं और बच्चों में अपनी संस्कृति को लेकर साहित्यिक अभिरुचि बढ़ाने में सहायक हैं। पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयवर्धन उप्रेती, कुमाऊंनी लेखिका सरस्वती कोहली, सामाजिक कार्यकर्ता बबीता पुनेठा आदि ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
आयोजक संस्था हिमाल प्रकाशन और अभिलाषा समिति की ओर से किशोर पंत ने लोगों का आभार जताया। नन्हीं चौपाल के संपादक विप्लव भट्ट ने संचालन किया। कार्यक्रम में पत्रकार कुंडल चौहान, रमेश गड़कोटी, राजेश पंगरिया, नरेश कांडपाल, सुशील खत्री, प्रकाश पांडेय, विपिन गुप्ता, लेखक प्रकाश पुनेठा, एनको संस्था के ललित पंत, रमेश शर्मा आदि रहे।