नेपाली मजदूरों का आना कम हुआ
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नोटबंदी के कारण नेपाल से आने वाले मजदूरों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। ठेकेदारों को निर्माण कार्य कराने के लिए लेबर नहीं मिल पा रही है। जो मजदूर काम पर हैं, उनको देने के लिए कैश का संकट है। ठेकेदारों को सरकारी कामों का भुगतान तो हो रहा है, लेकिन बैंक से सीमित भुगतान ही हो पा रहा है। इस सीजन में नेपाल से करीब 500 मजदूर अकेले डीडीहाट क्षेत्र में विभिन्न निर्माण कामों में लगे रहते थे, लेकिन इस बार यह संख्या सिमटकर 25 से 30 पर आ गई है। ठेकेदारों ने बताया कि नेपाल से मजदूर कम संख्या में आ रहे हैं। इस कारण निर्माण के कामों पर असर पड़ रहा है।
नेपाली मजदूरों के मेट गोविंद सिंह, खड़क सिंह ने बताया कि झूलाघाट, जौलजीबी, बलुवाकोट और धारचूला से मजदूरों के आने की संख्या कम हो गई है। यही नहीं नोटबंदी के बाद कई मजदूर यहां से लौट गए हैं। उन्होंने कहा कि काम करने के बाद लोगों के पास नकद भुगतान के लिए राशि नहीं है। इस कारण मजदूरी भी उधारी में करनी पड़ रही है। चेक के माध्यम से भुगतान ले पाना संभव नहीं है। बैंक चेक से भुगतान बिना खाता संख्या या आधार कार्ड के नहीं करते हैं।
मजदूरों के साथ दिक्कत यह है कि उनके बैंक खाते नेपाल में भी नहीं हैं। नोटबंदी लागू करते समय प्रधानमंत्री ने 50 दिन का समय मांगा था, लेकिन अब तक स्थितियां सामान्य नहीं हो पाई हैं। नोटबंदी के कारण विभिन्न क्षेत्रों पर पड़े असर की भरपाई कर पाना अभी संभव नहीं लग रहा है। नेपाल से कम संख्या में मजदूर आने के कारण उसका असर झूलाघाट, धारचूला, जौलजीबी और बलुवाकोट की बाजार में पड़ रहा है। भारतीय क्षेत्र में पैसा कमाने के बाद नेपाल के लोग इन बाजारों से ही खरीदारी करते हैं। अब न तो मजदूरों के पास पैसा है और न वह ज्यादा संख्या में आ पा रहे हैं।