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नेपाल सीमा से सटे कई गांवों की संचार सेवा ठप
ब्यूरो/अमर उजाला, झूलाघाट
Updated Sat, 03 Sep 2016 09:57 PM IST
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संचार सेवा ठप
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल सीमा से सटे भारतीय गांवों में दो महीनों से बीएसएनएल और डब्ल्यूएलएल सेवा पूरी से तरह ठप है। इस कारण कई गांवों का देश दुनिया से संपर्क कटा हुआ है। क्षेत्र में निजी कंपनियों के टावर नहीं होने के कारण इन गांवों के लोग अपनों से फोन पर बात करने के लिए भी तरस गए हैं। इन गांवों के सौ से भी अधिक परिवारों के लोग भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। उनसे बात करने के लिए परिजनों को 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
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जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर बसे मूनाकोट विकासखंड के नेपाल सीमा से सटे दौबास, अमकोट, खर्कतड़ी, खोलाकटियानी, बांस, पीपली, ड्योड़ा और रीठाखाली आदि गांवों में दो महीने से बीएसएनएल सेवा ठप है। साथ ही डब्ल्यूएलएल सेवा भी काम नहीं कर रही है। केंद्र सरकार ने सुरक्षा का हवाला देकर सीमा से सटे टावरों की रेंज तो कम कर रखी है, लेकिन इन टावरों के सिग्नल नेपाल के लोगों को सेवा जरूर दे रहे हैं। दोबास गांव के सामाजिक कार्यकर्ता गणेश जोशी ने बताया कि संचार क्रांति के इस दौर में इन गांवों के लोगों की समस्या ज्यादा बढ़ी है।
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उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में कोरी बयानबाजी करने वाले नेताओं का विरोध किया जाएगा। बीएसएनएल के जूनियर टेलीकॉम आफिसर अरविंद कुमार ने कहा कि बंद पड़े डब्ल्यूएलएल कनेक्शनों को चेक किया जा रहा है। जल्द ही इनको सुधारा जाएगा।
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यदि क्षेत्र में टावर के बीटीएस में खराबी आई है तो उसे तुरंत दुरुस्त करेंगे। जहां तक डब्ल्यूएलएल सेवा का सवाल है उच्चाधिकारियों के आदेश पर यह बंद है। -रमित मौर्या, डीजीएम बीएसएनएल अल्मोड़ा।