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संवेदनशील दुर्घटना स्थलों के चिन्हीकरण में लापरवाही
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:26 PM IST
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पिथौरागढ़ के धारचूला-तवाघाट एनएच पर संवेदनशील सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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सड़क दुर्घटनाओं में अकाल मौतें की बढ़ती संख्या के बाद भी संबंधित विभागों और एजेंसियों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। पिथौरागढ़ जिले में सड़क यातायात सुरक्षा की दिशा में कोई भी ठोस कदम उठाना तो दूर संवेदनशील, संभावित स्थलों के चिन्हीकरण की जहमत तक नहीं उठाई है।
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देश के अन्य हिस्सों की तरह ही पिथौरागढ़ जिले में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हर साल कई लोग अकाल जान गंवा रहे हैं, जबकि कई घायल होकर दुर्घटना का दंश झेल रहे हैं। जिले में हुई वाहन दुर्घटनाओं की जांच में सड़कों की ढांचागत कमी बड़े कारणों के रूप में उभर कर सामने आई है। आम तौर पर लगभग सभी मार्गों पर क्रश बैरियर के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा बरकरार है।
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कई खतरनाक मोड़ और स्थल दुर्घटना का आमंत्रण देते नजर आते हैं। इन संभावित स्थलों के चिन्हीकरण के बाद दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के उपाय किए जा सकते हैं। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, परिवहन, एनएच, लोनिवि आदि संबंधित विभाग, एजेंसियां सीधे जिम्मेदार हैं। बावजूद इसके दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपाय करना तो दूर पुलिस को छोड़कर संबंधित विभागों ने अब तक संभावित स्थलों का चिन्हीकरण तक नहीं किया है।
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वर्ष दुर्घटना मृतक घायल
2017 32 37 52
2016 31 52 45
2015 18 39 29
पुलिस ने चिन्हीकरण में की खानापूर्ति
संबंधित विभागों में से पुलिस ने संभावित स्थलों का चिन्हीकरण तो किया, लेकिन खानापूर्ति के अंदाज में। पिछले दिनों पुलिस ने जिले में 59 संभावित दुर्घटना स्थल चिन्हित किए थे, जबकि पिथौरागढ़ कोतवाली के साथ ही डीडीहाट, अस्कोट, जौलजीबी थाने का काम अधूरा मिला। खुद एसपी सिटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए मातहतों का जवाब तलब किया था। इसके बावजूद अब तक पुलिस के स्तर पर चिन्हीकरण का काम पूरा नहीं हुआ है।
जल्द ही संबंधित विभागों, एजेंसियों का संयुक्त चिन्हीकरण कराया जाएगा। चिन्हीकरण के बाद सड़क यातायात सुरक्षा के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे। इस काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। -सी रविशंकर, जिलाधिकारी, पिथौरागढ़