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Pithoragarh News: गंगोलीहाट में 1760 मीटर की ऊंचाई पर लगे हैं आम
Tue, 02 Jul 2024 11:23 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 02 Jul 2024 11:23 PM IST
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गंगोलीहाट के लाली गांव में लगे आम। संवाद
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) । समुद्र तल से 1760 मीटर की ऊंचाई पर ठंडी जलवायु वाले क्षेत्र में आम के पेड़ में फल दिखाई देना आश्चर्य लगता है। चार साल तक पाले से बचाए पेड़ों में फल लगे देख परिवार खुश है।
लाली गांव की गंगा देवी के आंगन में पेड़ में आम लगे हैं। गंगा देवी ने बताया कि कुछ साल पहले उनके बेटे ने आंगन में दो आम के पौधे लगाए। तब उन्होंने बेटे को यह कहकर टोका कि यहां बर्फ गिरती है और काफी अधिक पाला गिरता है। बेहद ठंडी जगह होने से कारण यहां पेड़ में आम नहीं लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि चार साल तक पौधों को बोरे, चादर से ढक कर पाले से बचाया। पेड़ बने तो उनमें से फल आने लगा। तीन साल पहले तक आम के फल कुछ समय बाद ही गिर जाते थे। दो या तीन आम ही खाने को मिलते थे।
इस बार जाड़ों के सीजन में उन्होंने फल नहीं देने वाले पेड़ को काट दिया। इसका फायदा हुआ कि दूसरे पेड़ में इस बार फलों का गिरना कम हो गया। ऊंचाई वाले लाली गांव में आम लगना आश्चर्यजनक तो है साथ ही उम्मीदों भरा भी है। सरकार और उद्यान विभाग इस ओर ध्यान दें और किसानों को प्रोत्साहित करें तो क्षेत्र के ऊंचाई वाली जगहों पर भी अच्छी प्रजाति के आम की पैदावार हो सकती है। इससे कई परिवारों को रोजगार भी मिलेगा।
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लाली गांव की गंगा देवी के आंगन में पेड़ में आम लगे हैं। गंगा देवी ने बताया कि कुछ साल पहले उनके बेटे ने आंगन में दो आम के पौधे लगाए। तब उन्होंने बेटे को यह कहकर टोका कि यहां बर्फ गिरती है और काफी अधिक पाला गिरता है। बेहद ठंडी जगह होने से कारण यहां पेड़ में आम नहीं लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि चार साल तक पौधों को बोरे, चादर से ढक कर पाले से बचाया। पेड़ बने तो उनमें से फल आने लगा। तीन साल पहले तक आम के फल कुछ समय बाद ही गिर जाते थे। दो या तीन आम ही खाने को मिलते थे।
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इस बार जाड़ों के सीजन में उन्होंने फल नहीं देने वाले पेड़ को काट दिया। इसका फायदा हुआ कि दूसरे पेड़ में इस बार फलों का गिरना कम हो गया। ऊंचाई वाले लाली गांव में आम लगना आश्चर्यजनक तो है साथ ही उम्मीदों भरा भी है। सरकार और उद्यान विभाग इस ओर ध्यान दें और किसानों को प्रोत्साहित करें तो क्षेत्र के ऊंचाई वाली जगहों पर भी अच्छी प्रजाति के आम की पैदावार हो सकती है। इससे कई परिवारों को रोजगार भी मिलेगा।
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