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रक्तदान कर यादगार बना रहे बेटी का बर्थडे
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Mon, 19 Dec 2016 10:48 PM IST
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रक्तदान कर यादगार बना रहे बेटी का बर्थडे
- फोटो : अमर उजाला
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एक समाजसेवी ऐसे भी हैं जो अपनी बेटी के जन्मदिन पर पिछले पांच साल से रक्तदान कर किसी न किसी को नया जीवन देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इस बार 18 साल की बेटी के खुद रक्तदान करने की हसरत अधूरी रह गई।
नगरपालिका के चंद्रभागा वार्ड के सभासद भुवन जोशी जोशी वर्ष 2012 से अपनी बेटी पारुल जोशी के जन्मदिन पर जिला रक्तकोष में रक्तदान करते आ रहे हैं। सोमवार को भी पारुल का जन्मदिन भी इसी तरह से मनाया गया। अब पारुल 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी है। पारुल ने भी अपने जन्मदिन पर इस बार रक्तदान करने की जिद की थी। जिद के आगे झुके जोशी पारुल को लेकर सुबह ही जिला रक्तकोष पहुंच भी गए। उनके साथ पारुल के मामा कमल बिष्ट भी थे।
इतना होने पर भी पारुल की रक्तदान की चाहत पूरी नहीं हो सकी। वजन कम होने के कारण रक्त कोष प्रभारी डॉ. नरेंद्र शर्मा ने पारुल का खून लेने से मना कर दिया। इसके बाद सभासद जोशी और मामा कमल बिष्ट ने पारुल के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए रक्तदान किया। पारुल का कहना है कि समाज में जहां कन्या भ्रूण हत्याएं हो रही हैं, वहीं उनके पिता बर्थडे पर रक्तदान कर उसे एक अनोखा तोहफा दे रहे हैं। इससे बढ़कर और कोई तोहफा नहीं हो सकता है।
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वह अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती है। 18 वर्ष पूरे होने पर उसने भी रक्तदान करने का सोचा था। जिला रक्तकोष प्रभारी डॉ. शर्मा जोशी के अनूठी पहल से प्रभावित हैं। उनका कहना है कि इस बात को समझना होगा कि रक्तदान से कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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नगरपालिका के चंद्रभागा वार्ड के सभासद भुवन जोशी जोशी वर्ष 2012 से अपनी बेटी पारुल जोशी के जन्मदिन पर जिला रक्तकोष में रक्तदान करते आ रहे हैं। सोमवार को भी पारुल का जन्मदिन भी इसी तरह से मनाया गया। अब पारुल 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी है। पारुल ने भी अपने जन्मदिन पर इस बार रक्तदान करने की जिद की थी। जिद के आगे झुके जोशी पारुल को लेकर सुबह ही जिला रक्तकोष पहुंच भी गए। उनके साथ पारुल के मामा कमल बिष्ट भी थे।
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इतना होने पर भी पारुल की रक्तदान की चाहत पूरी नहीं हो सकी। वजन कम होने के कारण रक्त कोष प्रभारी डॉ. नरेंद्र शर्मा ने पारुल का खून लेने से मना कर दिया। इसके बाद सभासद जोशी और मामा कमल बिष्ट ने पारुल के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए रक्तदान किया। पारुल का कहना है कि समाज में जहां कन्या भ्रूण हत्याएं हो रही हैं, वहीं उनके पिता बर्थडे पर रक्तदान कर उसे एक अनोखा तोहफा दे रहे हैं। इससे बढ़कर और कोई तोहफा नहीं हो सकता है।
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वह अपने आप को गौरवान्वित महसूस करती है। 18 वर्ष पूरे होने पर उसने भी रक्तदान करने का सोचा था। जिला रक्तकोष प्रभारी डॉ. शर्मा जोशी के अनूठी पहल से प्रभावित हैं। उनका कहना है कि इस बात को समझना होगा कि रक्तदान से कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।