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वनराजि परिवारों के लिए खुशहाली नहीं, बर्बादी का सबब बन जाती है बरसात...ये हैं समस्याएं
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मदनपुरी में ऐसे मकानों में रहते है वनराजि परिवार। संजू पंत डीडीहाट
- फोटो : AMAR UJALA
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। आदिम जनजाति कही जाने वाली वनराजि के लोग बरसात के दिनों में अपने परिवार के साथ कठिनाई भरा जीवन जीने को मजबूर है, कई वनराजि परिवारों के पास आज भी एक अदद मकान पक्का नही है। पूर्व में अधिक समय जगलों में रहने वाले वनराजि परिवारों ने 90 के दशक के बाद डीडीहाट तहसील के मदनपुरी, कूटा व चौरानी में अपने गांव बसाये। सरकार ने इन लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए कई योजना संचालित की। परंतु आज भी मदनपुरी, कूटा, चौरानी जैसे दुर्गम गांवों में बसने वाले वनराजि परिवारों के पास पक्का मकान तक नही है।
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मदनपुरी निवासी वनराजि हिम्मत सिंह बताते है कि मदनपुरी में रहने वाले अधिकत्तर मकान पत्थर व मिट्टी के बने है। बरसात शुरू होते ही इन मकानों की पाथर (स्लेट) से पानी आना शुरू हो जाता है। कई मकानों में तो गरीबी के कारण वनराजि पूरी स्लेट भी अपने मकान की छत में नही डाल सके है। हर साल बरसात व जाड़ों में वनराजि प्लास्टिक की पन्नी खरीदकर अपने परिवार को उन मकानों में रहने योग्य बनाते है।
वनराजि परिवार इस आशा में है कि सरकार की दीनदयाल आवास योजना से उन्हे भी एक पक्का मकान मिल सके। ग्राम प्रधान महेश कन्याल ने बताया कि सरकारी आवास योजना के चयन में सबसे पहले वनराजि परिवारों को ही प्राथमिकता दी जाती है।
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