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पांच माह पहले हुए हादसे से सबक लिया होता तो नहीं टूटता सामरिक महत्व का यह पुल

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2020 04:29 PM IST
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Lessons were not taken from the accident that happened five months ago.
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़। सामरिक महत्व की निर्माणाधीन मुनस्यारी-मिलम सड़क पर टनों भार वाली पोकलेन मशीन से लदे ट्राला को कमजोर पुल से गुजारने का प्रयास किया गया। इसके चलते चीन सीमा को जोड़ने वाला पुल चंद सेकेंड में धराशायी हो गया। महज पांच माह पूर्व कैलाश मानवरोवर यात्रा मार्ग पर इसी तरह हुए हादसे से भी सबक नहीं लिया गया।
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इस समय मुनस्यारी-मिलम मोटर मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। सड़क कटिंग के लिए निर्माण स्थलों में पोकलेन मशीनों को ले जाया जा रहा है। सीमा के लिए बन रही इस सड़क में सैनरगाड़ में बना यह पुल कुछ समय पूर्व क्षतिग्रस्त हो गया था। कमजोर होने के कारण इस पुल पर भारी वाहनों का संचालन न करने की चेतावनी लिखी गई थी। इसके बावजूद ट्राला चालक ने पोकलेन से लदे ट्राला को पुल पर चढ़ा दिया और पुल के साथ ही ट्राला और पोकलेन भी नदी में समा गई, जबकि इसी तरह की लापरवाही से विगत 20 जनवरी को धारचूला-तवाघाट मोटर मार्ग में कटिंग के लिए पोकलेन ले जा रहा ट्राला भी पुल टूटने से धौली गंगा नदी में समा गया था। इससे चीन सीमा से संपर्क टूट गया था। हालांकि बीआरओ ने इस स्थान पर वैली ब्रिज को केवल दस दिन में ही तैयार कर लिया था। इसके अलावा 2017 में गणाईगंगोली में भी एक साथ दो ट्रकों के गुजरते समय मोटर पुल ध्वस्त हो गया था। आज तक यह पुल नहीं बन सका है। यहां के लोग अब ट्राली से नदी पार करने को मजबूर हैं। ब्यूरो
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---:: सीमा पर तनातनी, फिर भी इतनी बड़ी चूक ::: पिथौरागढ़। चीन सीमा पर तनातनी के बाद भारत हर हाल में सीमा तक सड़क का निर्माण कर अपनी पहुंच बनाने के प्रयास में है। डेढ़ दशक के अथक प्रयास से लिपुलेख तक सड़क लिंक करने के बाद अब मिलम तक सड़क निर्माण का काम पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। मुनस्यारी और मिलम के बीच 18 किलोमीटर तक सड़क में बाधा बन रहीं चट्टानों को काटने के लिए हाल ही में सेना के हेलीकाप्टरों से मशीनें मिलम पहुंचाई गई हैं। मुनस्यारी और मिलम दोनों छोरों से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमा के मौजूदा हालात को देखते हुए इस समय सड़क और पुलों का दुरुस्त होना जरूरी है। बावजूद इसके सामरिक महत्व के पुल में टनों भार वाले पोकलेन लदे ट्राला को गुजारकर पुल ध्वस्त करने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुनस्यारी से मिलम तक सड़क लिंक नहीं होने से इस समय जवानों को पैदल ही अग्रिम चौकियों पर पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा सैन्य साजो सामान और रसद भी घोड़े खच्चरों से पहुंचाना पड़ता है। सैनरगाड़ में पुल टूटने से अब और भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ब्यूरो
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