{"_id":"609819be8ebc3eb2a10dcf20","slug":"labour-face-problems-to-get-job-pithoragarh-news-hld423878441","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना में काम को तरसे नेपाली मजदूर, दो वक्त का खाना जुटाना हुआ मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना में काम को तरसे नेपाली मजदूर, दो वक्त का खाना जुटाना हुआ मुश्किल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोरोना कर्फ्यू के चलते नेपाली मजदूरों के सामने रोजी- रोटी का संकट पैदा हो गया है। रोजाना कमाकर खाने वाले नेपाली मजदूरों को कोरोना के कारण कई दिनों से मजदूरी नहीं मिली है।
नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत 10 से 20 नेपाली मजदूर पल्लेदारी करके अपनी आजीविका चलाते हैं। वह ट्रांसपोर्ट से आने वाली गाड़ी से सामान को दुकानों तक पहुंचाने, रोड़ी बजरी, सीमेंट, सरिया आदि का ढुलान करके पैसा कमाते थे। परंतु जब से कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है, बाजार की दुकानें खुलनी बंद हो गई हैं तब से इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं बचा है।
नेपाली मजदूर गोविंद ने बताया कि पहले रोजाना 500 से 800 रुपये की कमाई कर लेता था। जब से कोरोना कर्फ्यू लगा है तब से कोई काम नहीं है। नेपाली होने के कारण उन्हें भारत सरकार की फ्री राशन योजना का लाभ भी नहीं मिलता है। कई नेपाली मजदूर तो एक वक्त का ही खाना खाकर काम ढूंढ़ रहे हैं। इस समय भवन निर्माण के कार्यों में भी कमी आने से निर्माण सामग्री ढोने का काम भी मजदूरों को नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत 10 से 20 नेपाली मजदूर पल्लेदारी करके अपनी आजीविका चलाते हैं। वह ट्रांसपोर्ट से आने वाली गाड़ी से सामान को दुकानों तक पहुंचाने, रोड़ी बजरी, सीमेंट, सरिया आदि का ढुलान करके पैसा कमाते थे। परंतु जब से कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है, बाजार की दुकानें खुलनी बंद हो गई हैं तब से इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं बचा है।
विज्ञापन
नेपाली मजदूर गोविंद ने बताया कि पहले रोजाना 500 से 800 रुपये की कमाई कर लेता था। जब से कोरोना कर्फ्यू लगा है तब से कोई काम नहीं है। नेपाली होने के कारण उन्हें भारत सरकार की फ्री राशन योजना का लाभ भी नहीं मिलता है। कई नेपाली मजदूर तो एक वक्त का ही खाना खाकर काम ढूंढ़ रहे हैं। इस समय भवन निर्माण के कार्यों में भी कमी आने से निर्माण सामग्री ढोने का काम भी मजदूरों को नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन