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चुनाव बहिष्कार पर अडिग कुसौली गांव वाले

Fri, 10 Feb 2017 10:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 10 Feb 2017 10:40 PM IST
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Kusuli villagers stood boycott
कुसौली गांव के लोगों से बात करते प्रशासन के लोग - फोटो : अमर उजाला

चक्काजाम करने के कारण मुकदमे झेल रहे कुसौली गांव के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला वापस नहीं लिया है। सेना द्वारा गांव का रास्ता बंद करने के विरोध में गांव के लोगों ने झूलाघाट-पिथौरागढ़ रोड पर 12 अप्रैल 2016 को जाम लगाया था। जाम लगाने के आरोप में प्रशासन ने गांव के 68 लोगों के खिलाफ धारा 371, 141 में मुकदमा दर्ज किया। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।

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शुक्रवार को राजस्व उपनिरीक्षक गोपाल डीनिया, जाजरदेवल के थाना प्रभारी नारायण सिंह ने कुसौली गांव जाकर ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह से मुलाकात की और चुनाव बहिष्कार का फैसला वापस लेने की अपील की, लेकिन प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांव के लोगों के साथ धोखा किया गया है। अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठा रहे ग्रामीणों को न्याय तो नहीं मिला, अब मुकदमे झेलने पड़ रहे हैं। वह चुनाव बहिष्कार पर अडिग हैं। राजस्व उपनिरीक्षक गोपाल डीनिया ने कहा कि वह ग्रामीणों से हुई वार्ता की जानकारी रिटर्निंग अफसर को देंगे। अब अगला कदम रिटर्निंग अफसर और जिला निर्वाचन अधिकारी को उठाना होगा। 
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नोटा का बटन दबाएंगे गुरिल्ले
समस्या के समाधान के मामले में लंबे समय से ठगे जा रहे एसएसबी के प्रशिक्षित गुरिल्लाओं ने इस बार चुनाव में नोटा का बटन दबाने का फैसला लिया है। जिले में गुरिल्लाओं की संख्या छह हजार के करीब है। शुक्रवार को यहां हुई बैठक में गुरिल्लाओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीति की आलोचना की। कहा कि अब तक सरकार ने एक भी घोषणा पर अमल नहीं किया। गुरिल्ला संगठन के अध्यक्ष दीपक भट्ट ने कहा कि सरकार ने गुरिल्लाओं को ईको टास्क फोर्स, आपदा प्रबंधन, लोक निर्माण विभाग में समायोजित करने की घोषणा तो की, लेकिन इन पर अमल नहीं किया। केंद्र सरकार ने दो बार गुरिल्लाओं का सत्यापन कर उनका सारा रिकार्ड अपने पास तो मंगा लिया, लेकिन रोजगार देने की पहल नहीं की। दस साल से अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलित गुरिल्लाओं ने इस बार चुनाव में नोटा का बटन दबाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में गुरिल्ला सरकार की नीतियों के कारण भारी परेशानी में आ गए हैं। उनकी आर्थिक हालत कमजोर हो गई है। बैठक में गोपाल सिंह, रामदत्त, कमला देवी, मालती देवी, पार्वती देवी, जानकी देवी, नारायण सिंह, करन सिंह ह्यांकी आदि मौजूद थे। बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी सभी गुरिल्लाओं को दी जा रही है।

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