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खेलाधुरा की महिलाओं ने नशे के खिलाफ छेड़ा अभियान
Fri, 19 Apr 2019 11:11 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 19 Apr 2019 11:11 PM IST
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धारचूला के खेला धूरा में नशाबंदी को लेकर आवाज उठाती महिलाएं।
- फोटो : पिथौरागढ़
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खेलाधुरा की महिलाओं ने कीड़ाजड़ी के दोहन के दौरान पूर्ण रूप से नशाबंदी लागू करने का फैसला किया है। महिलाओें ने कहा है कि नशाबंदी अभियान के दौरान अगर कोई व्यक्ति नशे में मिला तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा।
शुक्रवार को यहां हुई बैठक में महिलाओं ने निर्णय लिया कि कीड़ाजड़ी दोहन के दौरान छिपलाकोट में पूर्ण रूप से नशाबंदी रहेगी। यदि कोई व्यक्ति नशे की स्थिति में पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तवा घाट और दानि गांव में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस से अभियान चलाने की भी मांग की। महिलाओं ने शराबबंदी की इस मुहिम को अन्य तोकों तक ले जाने का भी फैसला किया है। तय किया गया कि 21 अप्रैल को ग्राम खेला के तोक रपली में बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में मंजू देवी, तुलसी आदि मौजूद थीं।
महिलाओं के इस अभियान के पीछे कीड़ाजड़ी के दोहन के दौरान सामने आने वाले विवाद भी हैं। कीड़ाजड़ी का दोहन करने के लिए लंबे समय तक गांव के लोग उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहते हैं। इस प्रवास के दौरान नशे का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कीड़ाजड़ी का दोहन भी पैसों के हिसाब से खासी कमाई वाला है। ऐसे में नशाखोरी कई गंभीर अपराधों को सबब बन रही है। महिलाआें का कहना है कि जब तक नशाबंदी नहीं रोकी जाएगी तब तक अन्य अपराधों पर भी अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
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शुक्रवार को यहां हुई बैठक में महिलाओं ने निर्णय लिया कि कीड़ाजड़ी दोहन के दौरान छिपलाकोट में पूर्ण रूप से नशाबंदी रहेगी। यदि कोई व्यक्ति नशे की स्थिति में पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तवा घाट और दानि गांव में अवैध शराब के खिलाफ पुलिस से अभियान चलाने की भी मांग की। महिलाओं ने शराबबंदी की इस मुहिम को अन्य तोकों तक ले जाने का भी फैसला किया है। तय किया गया कि 21 अप्रैल को ग्राम खेला के तोक रपली में बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में मंजू देवी, तुलसी आदि मौजूद थीं।
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महिलाओं के इस अभियान के पीछे कीड़ाजड़ी के दोहन के दौरान सामने आने वाले विवाद भी हैं। कीड़ाजड़ी का दोहन करने के लिए लंबे समय तक गांव के लोग उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहते हैं। इस प्रवास के दौरान नशे का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कीड़ाजड़ी का दोहन भी पैसों के हिसाब से खासी कमाई वाला है। ऐसे में नशाखोरी कई गंभीर अपराधों को सबब बन रही है। महिलाआें का कहना है कि जब तक नशाबंदी नहीं रोकी जाएगी तब तक अन्य अपराधों पर भी अंकुश लगाना मुश्किल होगा।
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