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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग दुर्गम और चुनौतीपूर्ण

Mon, 12 Jun 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Mon, 12 Jun 2017 10:14 PM IST
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Kailash Mansarovar Yatra is inaccessible and challenging
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लखनपुर के पास सड़क निर्माण के दौरान गिरे पत्थर - फोटो : अमर उजाला

लिपुलेख दर्रे से होकर की जाने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को प्रशासन, कुमाऊं मंडल विकास निगम, पुलिस एवं आईटीबीपी ने अत्यधिक दुर्गम और चुनौतीपूर्ण की श्रेणी में रखा है। दिल्ली से लिपुलेख तक 696 किलोमीटर की इस यात्रा में कई प्रकार के अवरोध आते रहते हैं। यात्रा ठीक मानसून सीजन में होती है, इस कारण सड़क मार्ग के अलावा पैदल मार्गों पर हर समय खतरा बना रहता है। तभी इस यात्रा के संचालन में एजेंसियों को ताकत झोंकनी पड़ती है। यात्रियों को 16730 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रे को पार कर तिब्बत में प्रवेश करना पड़ता है। यह बात अलग है कि तिब्बत में कैलाश परिक्रमा क्षेत्र में यात्रियों को कम से कम आवागमन और संचार की कोई दिक्कत नहीं होती।

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यात्री पहले दिन दिल्ली से 340 किलोमीटर का सफर तय कर अल्मोड़ा पहुंचते हैं। अगले दिन अल्मोड़ा से धारचूला तक 220 किलोमीटर का सफर भी वाहनों से होता है। तीसरे दिन यात्रियों को 60 किलोमीटर की यात्रा करनी होती है। इसमें धारचूला से नारायणआश्रम तक 54 किलोमीटर वाहन से और वहां से 6 किलोमीटर सिर्खा तक पैदल जाना होता है। सिर्खा यात्रियों का पहला पैदल पड़ाव है। चौथे दिन यात्री सिर्खा से गाला तक 14 किलोमीटर का पैदल सफर करेंगे। पांचवें दिन गाला से 18 किलोमीटर पैदल चलकर यात्रियों को बूंदी पड़ाव ले जाया जाएगा। छठे दिन यात्री बूंदी से 17 किलोमीटर पैदल चलकर गुंजी पहुंचेंगे।
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सातवें दिन का सफर ज्यादा कष्टकारक होता है। उस दिन यात्री गुंजी से 17 किलोमीटर चलकर नाभीढांग पहुंचेंगे, लेकिन अगले दिन तड़के करीब तीन बजे लिपुलेख दर्रे के लिए रवाना होंगे। नाभीढांग से लिपुलेख की दूरी 10 किलोमीटर है। दर्रे को सुबह सात बजे से पहले पार करना पड़ता है। उसके बाद वहां पर तेज हवा चलने लगती है। बूंदी से गाला तक का पैदल रास्ता सबसे कठिन है। इसमें यात्रियों को 4000 सीढ़ियां पार करनी पड़ेंगी। रास्ते के एक ओर कठोर चट्टान है तो दूसरी तरफ तेज गति से बहने वाली महाकाली है। नारायणआश्रम से लिपुलेख दर्रे तक बरसाती नाले, झरने, बर्फ, खतरनाक रास्ते हैं। इससे अलावा सड़क मार्गों के भी बारिश के सीजन में मलबा आने के कारण बंद होने का खतरा रहता है। 
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यात्रा के दौरान जिला पुलिस की व्यवस्था
पिथौरागढ़। पुलिस अधीक्षक अजय जोशी ने बताया कि करीब चार माह तक चलने वाली यात्रा को सही ढंग से संचालित करने के लिए गुंजी में अस्थायी थाना खुल गया है। इसके अलावा गर्ब्यांग, बूंदी, गाला, सिर्खा और मिर्थी में अस्थायी चौकी खोली गई है। हर दल के साथ एक पुलिसकर्मी सबसे आगे और एक पुलिसकर्मी सबसे पीछे वायरलेस सेट के साथ चलेगा। यात्रा संचालन के लिए चार उपनिरीक्षक, 24 कांस्टेबल, दो एलआईयू कर्मी, सात संचार कर्मी, हर दल के साथ एसडीआरएफ के पांच-पांच जवान और होमगार्ड के 50 जवान तैनात किए गए हैं।

भोजन और आवास की व्यवस्था
पिथौरागढ़। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए हर पड़ाव पर भोजन और आवास की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम करता है। पैदल पड़ावों के लिए राशन, दाल समेत सारी सामग्री पांच जून को धारचूला से घोड़ों पर लादकर रवाना की जा चुकी है। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि हर पड़ाव के लिए पर्याप्त राशन पहुंचाया जा चुका है। केएमवीएन हर यात्री से 35 हजार रुपये लेती है। इसी में उनके भोजन, आवास और गाइड का खर्च शामिल रहता है।

गुंजी से आगे की सारी व्यवस्था आईटीबीपी के पास
डीडीहाट। गुंजी में यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने से लेकर लिपुलेख दर्रा पार कराने तक कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुरक्षा, संचार का जिम्मा आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी के पास रहता है। आईटीबीपी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम, डॉक्टरों की टीम, महिला कमांडो टीम गुंजी पहुंच चुकी है। तिब्बत में यात्रियों के पहुंचने के बाद आईटीबीपी ही उनके संपर्क में रहती है। हर यात्री दल के बारे में सूचना रोज आईटीबीपी नियंत्रण कक्ष को मिल जाती है। किसी यात्री को माउंटेन सिकनेस की समस्या होने पर गुंजी में हाइपो बैग भी रख दिए गए हैं।


यात्रा के दौरान सड़क मार्गों की खास निगरानी
पिथौरागढ़। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा को देखते हुए लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन को अलर्ट कर दिया गया है। मलबा आने के कारण यदि कहीं पर रोड बंद होती है तो उसे तत्काल खोल दिया जाएगा। अल्मोड़ा से बेड़ीनाग तक, थल से डीडीहाट तक, डीडीहाट से जौलजीबी तक और धारचूला से तवाघाट तक की सड़क ज्यादा संवेदनशील है। इनमें यात्रियों के आते-जाते समय खास प्रबंध रहेंगे। जिला मुख्यालय में यात्रा के दौरान नियंत्रण कक्ष काम करेगा।

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